ऋषिकेश। 18 मई को हुए उज्जैनी एक्सप्रेस डिरेलमेंट मामले में रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ रेल कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही के बाद रेलवे ने मुख्य आरोपी लोको पायलट को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटाकर पुनः प्रशिक्षण के लिए चंदौसी भेज दिया है। वहीं अन्य सात कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना की विस्तृत जांच में यह तथ्य सामने आया कि शंटिंग प्रक्रिया के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, लोको पायलट की अनुपस्थिति में ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े चेन और गुटके हटाए गए, जिसके कारण ट्रेन असंतुलित हो गई और डिरेलमेंट की घटना हुई। रेलवे ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की है।
मुरादाबाद रेल मंडल के अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। इसी कारण दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में एक महीने के भीतर अंतिम दंडात्मक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशिक्षण और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं।
उधर, रेलवे ने पुराने मामलों में भी जवाबदेही तय करने का सिलसिला जारी रखा है। देहरादून में हुए एक पूर्व रेल हादसे के मामले में दोषी पाए गए शंटिंग मास्टर की एक वर्ष की वेतन वृद्धि रोक दी गई है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है।
इस कार्रवाई को रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







