ममता सिंह, नई दिल्ली।
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में ‘हिंदी पत्रकारिता महोत्सव’ का भव्य आगाज हुआ। यह दो दिवसीय महोत्सव हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन कला, साहित्य और मीडिया जगत की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की और उदन्त मार्तण्ड से शुरू हुए हिंदी पत्रकारिता के सफर को याद किया।
उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल की महागाथा को मैं भारत के इतिहास की गाथा मानता हूं।उन्होंने आगे कहा कि मैं एक घंटे से सुन रहा हूं और समझ रहा हूं कि यह कोई साधारण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की वैचारिक स्वतंत्रता का उत्सव है। भारत की आत्मा को जाग्रत करने में भारतीय पत्रकारिता का सबसे बड़ा योगदान रहा है। ब्रिटिशराज के समय पत्रकारिता राष्ट्रीय चेतना को जगाने के काम आई थी। तिलक और गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे पत्रकार राष्ट्र में नई सोच पैदा करने वाले वाहक थे।
केंद्रीय मंत्री ने ग्वालियर राजघराने का पत्रकारिता से जुड़ाव साझा करते हुए बताया कि उनके परदादा महाराजा जयाजीराव सिंधिया द्वारा ग्वालियर के बाड़े में सिंधिया परिवार का पत्र छपता था।उनकी योजना है कि इस पुराने छापाखाने को एक म्यूजियम की शक्ल दी जाए, जहां पुराने सभी इंस्ट्रूमेंट्स रखे जाएंगे।

समारोह में आईजीएनसीए के अध्यक्ष पद्म भूषण राम बहादुर राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लिखित संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षीय यात्रा को भारत की चेतना, विचार और जन-जागरण का उत्सव बताया। इसके बाद मंच से एक स्मारक डाक टिकट और ‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल की महागाथा’ नामक महाग्रंथ का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि पत्रकारिता का इतिहास काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। पुराने मनीषियों ने पत्रकारिता को पेशे से ज्यादा मिशन मानकर जनचेतना जगाई और यातनाएं झेलीं। आज के दौर में तकनीक और समाज का स्वभाव बदलने से चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे में पत्रकारों को पुराने दौर के मूल्यों को बरकरार रखते हुए कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की जरूरत है। उन्होंने राम बहादुर राय के कुशल नेतृत्व में बीते 10 साल में इस केंद्र द्वारा किए गए शोधपूर्ण कार्यों की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी का अखबार ‘प्रताप’ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मुख्य केंद्र था। मिश्र जी ने ‘कल्याण’ पत्रिका के संस्थापक भाई जी श्री हनुमानप्रसाद पोद्दार के सिद्धांतों का विशेष जिक्र किया। न्होंने बताया कि गांधी जी को दिए वचनों के कारण ‘कल्याण’ ने 100 साल तक कोई विज्ञापन या पुस्तक समीक्षा नहीं छापी। हालांकि, जब भाई जी गांधी जी के कुछ निर्णयों से असहमत हुए, तो उन्होंने अपनी बात खुलकर लिखी। उनकी इसी निस्वार्थ साधना के कारण जब तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने उन्हें ‘भारत रत्न’ का प्रस्ताव भेजा, तो भाई जी ने उसे विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया था।

माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल के संस्थापक और इस कार्यक्रम के सह संयोजक विजयदत्त श्रीधर ने पत्रकारिता के 200 साल के सफर को बखूबी बयां किया। उन्होंने पंडित जुगलकिशोर की कानपुर से कोलकाता की यात्रा, समाचार पत्र की स्थापना और अंग्रेजों के खिलाफ उनके प्रतिरोध की कहानी सुनाई। उन्होंने सुधावर्षन दैनिक, वर्नाकुलर प्रेस एक्ट, मालवा अखबार और ग्वालियर के अखबार से शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के ऐतिहासिक प्रसंगों को भी रेखांकित किया।

सत्र के अंत में वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने दोटूक शब्दों में कहा कि लोकतंत्र है तो पत्रकारिता है। उन्होंने सोशल मीडिया के कंटेंट को खबर मानने से इंकार करते हुए कहा कि पत्रकार अपना स्वधर्म जानें। वे नई तकनीक अपनाते हुए भी पत्रकारिता के मूल धर्म को अपनाएं और निडर होकर आम जनजीवन के सरोकारों के लिए लड़ें।

मंच का शानदार संचालन संसद टीवी की वरिष्ठ पत्रकार प्रीति सिंह ने किया। अंत में मीडिया सेंटर प्रभारी अनुराग पुनेठा ने धन्यवाद प्रस्ताव देकर पहले दिन के कार्यक्रम का विधिवत समापन किया।








