---Advertisement---

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल: डॉ. निशंक ने बताया विकसित भारत के निर्माण में मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

देहरादून। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर लेखक गांव एवं स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में डालनवाला स्थित रचना संसार सभागार में “विकसित भारत के निर्माण में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष” विषय पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा, उसकी उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यमंत्री डॉ. देवेंद्र भसीन ने हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज को सही दिशा देना और जनता के विश्वास को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में पत्रकारिता की मौलिकता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने पत्रकारों से तकनीक और मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता, प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने पिछले 200 वर्षों में राष्ट्रचेतना को जागृत करने, स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और सामाजिक सरोकारों को स्वर देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में पत्रकारिता की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। पत्रकारिता को समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और निष्पक्षता के साथ करना होगा।

विशिष्ट अतिथि पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता राष्ट्र निर्माण की आधारशिला रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय विचारधारा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने कहा कि हिंदी आज विश्व की प्रमुख भाषाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र और मीडिया संस्थान समाज की चेतना के वाहक हैं और इनके बिना आधुनिक समाज की कल्पना संभव नहीं है।

इस अवसर पर इंडिया न्यूज़ के स्टेट हेड संजय श्रीवास्तव, दूरदर्शन के कार्यकारी निदेशक अनिल भारती, वरिष्ठ पत्रकार विपिन कन्याल, जेपी पंवार और सुभाष कुशवाहा सहित कई वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता की उपलब्धियों और समकालीन चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन आशना कंडियाल नेगी ने किया, जबकि संयोजन स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. पूजा डबास ने किया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में पत्रकार, शिक्षाविद, शोधार्थी और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में सभी वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और जनसरोकारों को बनाए रखने का संकल्प लिया।

Related Post

LATEST Post

---Advertisement---