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ईरान तनाव का बड़ा असर! तेल सप्लाई ठप होने से बढ़ सकती है महंगाई और आर्थिक मंदी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडरा रहे संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष आज ही समाप्त हो जाए, तब भी होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में साल 2027 की पहली या दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जाबेर ने अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में कहा कि मौजूदा हालात ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरी को उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी प्री-वॉर स्तर की करीब 80 फीसदी तेल सप्लाई बहाल करने में कम से कम चार महीने लगेंगे, जबकि पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में लंबा समय लग सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी पहले ही इस स्थिति को इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बता चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अब निगरानी का दायरा बढ़ाते हुए यूएई के गल्फ ऑफ ओमान तट तक अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। हालांकि यूएई की फुजैरा पाइपलाइन फिलहाल कुछ राहत दे रही है, जिससे सीमित मात्रा में तेल निर्यात जारी है।

सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के प्रमुख अमीन नासिर ने भी चेतावनी दी है कि यदि जून मध्य तक हालात नहीं सुधरे तो वैश्विक तेल बाजार 2027 तक स्थिर नहीं हो पाएगा। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखने लगा है, जहां ईंधन की कीमतों में करीब 30 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज संकट लंबा खिंचता है तो महंगाई बढ़ सकती है, परिवहन लागत महंगी हो सकती है और वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा और गहरा सकता है।

 

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