रानीखेत में भारतीय सेना की ओर से युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की सामरिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संभावनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष ‘सीमा दर्शन टूर’ का आयोजन किया गया। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट्स के इस दल को लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह टूर युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों और भारतीय सेना के कार्यों को करीब से समझने का अवसर देगा।
भारतीय सेना के जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी ने बताया कि 80 यूके एनसीसी बटालियन के 20 कैडेट्स इस भ्रमण में शामिल हैं। भ्रमण के दौरान कैडेट्स वाइब्रेंट विलेज गुंजी में तैनात भारतीय जवानों के साथ समय बिताएंगे और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सेना के सामरिक अभियानों की जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही उन्हें सीमावर्ती गांवों की संस्कृति, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं से भी अवगत कराया जाएगा।
टूर के दौरान कैडेट्स काली माता मंदिर, ओम पर्वत, आदि कैलाश पर्वत और पार्वती कुंड झील जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करेंगे। सेना का मानना है कि इस पहल से युवाओं में देशभक्ति, नेतृत्व क्षमता और सीमांत क्षेत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
यह कार्यक्रम हाल ही में 119 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड ग्रुप और विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू का परिणाम है। इसके तहत तकनीक, साइबर अध्ययन, सतत विकास और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है। सेना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में पर्यटन और रोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा देकर रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करना भी है।
भारतीय सेना की यह पहल युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के विकास की नई संभावनाएं खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।








