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आपदा से निपटने की तैयारी तेज, हर विभाग में कंट्रोल रूम और टास्क फोर्स बनाने के निर्देश

 देहरादून। आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने और जनजीवन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने रविवार को सड़क, विद्युत, पेयजल, सिंचाई, नगर निगम, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को समयबद्ध और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के अनुरूप विभागों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई ही आपदा प्रबंधन की सफलता की कुंजी है। उन्होंने प्रत्येक विभाग को अपने स्तर पर टास्क फोर्स, कंट्रोल रूम और वार रूम स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

डीएम ने स्पष्ट कहा कि जनहित से जुड़े सभी प्राथमिकता वाले निर्माण और मरम्मत कार्य 7 जून तक हर हाल में पूरे किए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कें तत्काल लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित की जाएं, जिससे उनकी मरम्मत और पुनर्स्थापन का कार्य समय पर शुरू हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि विभागों के बीच किसी भी प्रकार की संचार कमी या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मानसून से पहले नदी, नहरों और बरसाती नालों के चैनलाइजेशन कार्य को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग, पीएमजीएसवाई और लोक निर्माण विभाग को सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने, नालियों और स्कवरों की नियमित सफाई तथा गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करने को कहा गया।

जलभराव संभावित क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) की निगरानी बढ़ाने तथा विकासनगर, ऋषिकेश और नदी किनारे की संवेदनशील बस्तियों में विशेष टास्क फोर्स तैनात करने के निर्देश भी दिए गए। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस को प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया।

बैठक में सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायतों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वह स्वयं शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेंगे और इसके लिए जिला स्तर पर विशेष कॉल ऑपरेटर की व्यवस्था की जाएगी।

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