भोपाल/नई दिल्ली। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा राष्ट्रीय वेबिनार एवं ई-सम्मेलन का आयोजन किया गया। “हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष : पत्रकारिता में डिजिटल युग की चुनौतियाँ एवं भविष्य की दिशा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और मीडिया विशेषज्ञों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बिहार के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रोफेसर साकेत रमण ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने दो शताब्दियों की यात्रा में समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समाचारों का तथ्यात्मक सत्यापन और निष्पक्ष प्रस्तुतीकरण बेहद आवश्यक है। बिना पुष्टि के समाचार प्रकाशित करना मीडिया की साख को प्रभावित कर सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार चंदन शर्मा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के प्रभाव को बढ़ाने के लिए भाषा की संवेदनशीलता, अभिव्यक्ति की गुणवत्ता और विषय की गहराई पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने पत्रकारिता को समाज की चेतना को दिशा देने वाला सशक्त माध्यम बताया।
भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता होती है। तकनीकी बदलावों के बावजूद सत्य और निष्पक्षता पर आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
संघ के संस्थापक शाहनवाज़ हसन ने डिजिटल मीडिया को अवसरों का नया मंच बताते हुए कहा कि पत्रकारों को नई तकनीकों को अपनाकर बदलते समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए। वहीं वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्रा ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद सकारात्मक सोच, निरंतर अध्ययन और पेशेवर दक्षता पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नवीन आनंद जोशी ने किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक हिंदी पत्रकारिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वेबिनार में देशभर से पत्रकारों, मीडिया विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा सत्य, निष्पक्षता और जनहित आधारित पत्रकारिता को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।







