देहरादून। महेंद्र भट्ट ने अमेरिका में आयोजित तथाकथित धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की सुनवाई में भारतीय नेताओं और हिंदुत्व संगठनों को निशाना बनाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे हिंदुत्व की मजबूत आवाजों पर विदेशी मंच से हमला बताते हुए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि भारत की संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित की बात करने वाले नेताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर घेरने की कोशिश पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को देश में धर्म और संस्कृति की बात होने से इतनी परेशानी है कि वे विदेशी मंचों का इस्तेमाल कर भारत की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
भट्ट ने कहा कि USCIRF की सुनवाई में पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई। उनके अनुसार ये तीनों नेता लगातार हिंदू संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित के मुद्दों पर मुखर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान एक एक्टिविस्ट द्वारा हिंदुत्व विचारधारा और राष्ट्रवादी संगठनों के खिलाफ बयानबाजी की गई तथा इन नेताओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग तक उठाई गई। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों को भी निशाना बनाया गया।
भट्ट ने सवाल उठाया कि आखिर हिंदू संस्कृति और भारतीय सभ्यता की रक्षा की आवाज कुछ लोगों को इतनी क्यों चुभ रही है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी धर्मों और विचारों को सम्मान दिया जाता है। ऐसे में विदेशी मंचों पर भारत और उसके लोकतांत्रिक ढांचे को बदनाम करने की कोशिश गलत है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोग देश की संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेंगे।








