देहरादून। गणेश जोशी ने प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों और नई फसलों के जरिए मजबूत बनाने पर जोर दिया है। मंगलवार को अपने कैंप कार्यालय में कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने विशेष रूप से मोरिंगा (सहजन) की खेती की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उत्तराखंड की जलवायु औषधीय और बागवानी फसलों के लिए बेहद अनुकूल है, ऐसे में मोरिंगा जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर आय का विकल्प दिया जा सकता है।
बैठक में मौजूद निजी संस्था के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि उनकी संस्था असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मोरिंगा उत्पादन और प्रसंस्करण पर सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बेहतर कार्य करने वाली संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर देहरादून में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मोरिंगा की खेती और प्रोसेसिंग शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
बैठक में 11 और 12 जून को सौगंध पौध केंद्र देहरादून में आयोजित होने वाली दालचीनी खेती, नर्सरी और पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी आधारित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि यह कार्यशाला उत्तराखंड में दालचीनी उत्पादन को नई दिशा देगी। कार्यक्रम में श्रीलंका, इंडोनेशिया और वियतनाम के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, जो आधुनिक तकनीकों और सफल मॉडल साझा करेंगे।
इसके अलावा 12 और 13 जून को आयोजित होने वाले उत्तराखंड उद्यानिकी शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।








