Dehradun से जुड़े कृषि मंत्री Ganesh Joshi ने अपने असम दौरे के दौरान प्रसिद्ध Hathikuli Tea Estate का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चाय बागानों में कार्यरत महिला श्रमिकों से संवाद किया और स्वयं चाय की ताजी पत्तियां तोड़कर पारंपरिक टोकरी में एकत्रित कीं।
कृषि मंत्री ने असम की चाय उद्योग और वहां के श्रमिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि असमिया चाय केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि राज्य की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चाय बागानों से जुड़े परिवारों का परिश्रम पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
भ्रमण के दौरान गणेश जोशी ने हाथीकुली स्थित चाय फैक्ट्री का भी निरीक्षण किया। उन्होंने चाय उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन प्रणाली की विस्तृत जानकारी ली। फैक्ट्री में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं का अवलोकन करते हुए मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में भी चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए असम के अनुभवों का उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने बताया that वर्तमान में Uttarakhand में लगभग 1592 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चाय बागानों का विकास और रखरखाव किया जा रहा है। राज्य में करीब 7 लाख किलोग्राम हरी चाय पत्तियों का उत्पादन होता है, जिससे 1.44 लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय तैयार की जाती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाय उत्पादन के साथ-साथ टी-टूरिज्म को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत घोड़ाखाल, चम्पावत और कौसानी में टी-टूरिज्म योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि चाय बोर्ड के अंतर्गत राज्य में वर्तमान में पांच चाय फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। सरकार किसानों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने और उत्तराखंड की चाय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।








