जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि सामने आई है। प्रख्यात विरासत शोधकर्ता डॉ. आरती देवी ने जम्मू क्षेत्र के डोगरा कालीन किलों और महलों पर केंद्रित अपने शोध के लिए पीएचडी की उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की है। उन्होंने यह शोध हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से, इतिहास विषय में, डॉ. रवि शरण दीक्षित के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।

डॉ. आरती देवी का शोध डोगरा शासनकाल (1800–1950) के दौरान निर्मित किलों और राजमहलों की ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्ता पर केंद्रित है। उनके शोध की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने पारंपरिक इतिहास लेखन से आगे बढ़कर जीआईएस मैपिंग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और अंतर्विषयी शोध तकनीकों का प्रयोग किया। यह शोध डोगरा विरासत के संरक्षण और उसके वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में एक नई सोच प्रस्तुत करता है।
इतिहास विषय में स्नातकोत्तर डॉ. आरती देवी ने जेके-सेट और एनटीए-नेट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की हैं। वे अब तक अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों और कार्यशालाओं में शोध पत्र प्रस्तुत कर चुकी हैं। उनके शोध पत्र विभिन्न प्रतिष्ठित अकादमिक जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं, जिससे उनकी विद्वता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
शोध कार्य के साथ-साथ उन्होंने शैक्षणिक प्रकाशनों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे एक पुस्तक की संपादक रह चुकी हैं, जिसमें पर्यावरणीय क्षरण जैसे समकालीन विषयों पर विमर्श किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में “Whispers of the Past: Rediscovering Cultural Heritage of India” नामक विशेष अंक का संपादन किया, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
डॉ. आरती देवी की शैक्षणिक उत्कृष्टता को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। उन्हें सक्षम सोसाइटी द्वारा ‘उत्कृष्ट शोधकर्ता पुरस्कार’, उत्थान फाउंडेशन द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय महिला अचीवर अवॉर्ड’ तथा जीकेएसएसएस द्वारा ‘डॉ. बी. आर. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय आइकन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है।
उनके शोध मार्गदर्शक डॉ. रवि शरण दीक्षित ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. आरती देवी भविष्य में भी भारतीय सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।








