आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देने के दावों के बीच देहरादून में हुए औचक निरीक्षण ने कई निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं और विभागीय कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
निरीक्षण अभियान का नेतृत्व डॉ. सरोज नैथानी ने किया। टीम में डॉ. अपूर्वा, पंकज, पुनीत और नवीन चमोली भी शामिल थे। टीम ने देहरादून के कई निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों का निरीक्षण कर वहां मरीजों को दी जा रही सुविधाओं और आयुष्मान योजना के पालन की स्थिति की जांच की।
निरीक्षण के दौरान अरिहंत अस्पताल में डायलिसिस सेंटर की हालत बेहद खराब पाई गई। छह बेड का सेंटर छोटे कमरे में संचालित हो रहा था और वहां डॉक्टर की नियमित निगरानी भी नहीं थी। नर्सिंग स्टाफ को डायलिसिस प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने पर अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
हंस डायलिसिस सेंटर में मरीजों को योजना के प्रति जागरूक करने वाली IEC गतिविधियों की कमी पाई गई। वहीं ओजस्वी अस्पताल में दो मरीजों को अनावश्यक रूप से आईसीयू में भर्ती करने और गोल्डन कार्ड धारकों से पैसे लेने की शिकायत सामने आई। इससे योजना के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
इसके अलावा बालूनी अस्पताल में आयुष्मान लाभार्थी से 17,250 रुपये वसूले जाने का मामला सामने आया, जबकि योजना के तहत उपचार पूरी तरह निशुल्क होना चाहिए। मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने जांच के संकेत दिए हैं। राहि नेत्रालय में भी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि आयुष्मान योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगे भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और दोषी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।








