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उत्तराखंड में ‘ड्रैगन फ्रूट क्रांति’! महिलाओं की आय बढ़ाने वाला नया मॉडल बना नैनीताल

नैनीताल। Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार की ग्रामीण विकास और स्वरोजगार योजनाएं अब जमीनी स्तर पर बड़ा असर दिखाने लगी हैं। नैनीताल जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बनकर उभर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है।

जनपद के बैलपड़ाव क्षेत्र में रेखा गोस्वामी “गौरा समूह” और “विकास सीएलएफ” के माध्यम से ड्रैगन फ्रूट उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं। समूह आधारित और व्यक्तिगत स्तर पर स्थापित इकाइयों ने क्षेत्र में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वर्तमान में यहां लगभग दो टन उत्पादन की संभावना जताई जा रही है, जबकि आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है।

बाजार में ड्रैगन फ्रूट की लगातार बढ़ती मांग और लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलने वाली कीमत ने इसे लाभकारी खेती का मॉडल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित जोखिम और कम रखरखाव के कारण यह फसल किसानों के लिए बेहतर आय का स्रोत बन सकती है। प्रति पौधा लगभग 1300 से 1370 रुपये की लागत आने के बावजूद यह दीर्घकालिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो रही है।

ग्रामोत्थान परियोजना के तहत रेखा गोस्वामी को 75 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई, जिसके माध्यम से करीब सात लाख रुपये की लागत से ड्रैगन फ्रूट इकाई स्थापित की गई। विशेषज्ञों के अनुसार अगले तीन वर्षों में यह इकाई 6 से 7 टन तक उत्पादन देने में सक्षम होगी।

स्थानीय लोग इस पहल को केवल खेती नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नई पहचान के रूप में देख रहे हैं। सरकार की यह योजना ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और पलायन रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है

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