देहरादून। Centre of Indian Trade Unions (सीटू) ने श्रमिक अधिकारों और श्रम कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। गुरुवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित एक दिवसीय श्रमिक सम्मेलन में देशभर के श्रमिक संगठनों से जुड़े नेताओं ने श्रम कानूनों को बहाल करने के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीटू के राष्ट्रीय महामंत्री और पूर्व सांसद A. K. Padmanabhan तथा राष्ट्रीय सचिव K. N. Umesh ने कहा कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने चार नए श्रम कोड लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महामारी जैसी आपदा के समय श्रमिक हितों की अनदेखी करते हुए पुराने श्रम कानूनों को कमजोर करने का प्रयास किया।
नेताओं ने कहा कि सीटू और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के लगातार विरोध और आंदोलनों के कारण सरकार अब तक इन श्रम संहिताओं को पूरी तरह लागू नहीं कर सकी है। उन्होंने दावा किया कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों को बचाने के लिए आने वाले समय में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा, रोजगार स्थिरता, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे आज भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में संगठित होकर संघर्ष करना समय की जरूरत है। उन्होंने श्रमिकों से एकजुट रहने और अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
कार्यक्रम में सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष महेंद्र जखमोला, महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी, सचिव लेखराज, एस.एस. नेगी, जिला सचिव अभिषेक भंडारी सहित बड़ी संख्या में श्रमिक और विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आशा कार्यकर्ताओं, भोजन माताओं और अन्य श्रमिक संगठनों की महिलाओं ने भी सम्मेलन में भाग लेकर श्रमिक मुद्दों पर अपनी बात रखी।
सम्मेलन के अंत में श्रमिक हितों की रक्षा और श्रम कानूनों की बहाली को लेकर संयुक्त संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।








