देहरादून। देहरादून का रेसकोर्स मैदान इस वर्ष शारदीय नवरात्रों में एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का गवाह बनेगा। “श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.)” द्वारा 22 सितंबर से 3 अक्टूबर 2025 तक आयोजित “भव्य रामलीला महोत्सव 2025” की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं।
इस अवसर पर महोत्सव की स्मारिका पुस्तिका का विमोचन रामलीला समिति के संरक्षक मंडल के सदस्य और 1961 से जुड़े वरिष्ठतम कलाकार श्री बछेंद्र कुमार पांडेय ने किया। वे 50 वर्षों बाद 2023 में फिर से रामलीला में भूमिका निभाकर दर्शकों की भावनाओं से जुड़े थे।
परंपरा और तकनीक का संगम
समिति अध्यक्ष अभिनव थापर ने जानकारी दी कि पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के बाद से यह ऐतिहासिक रामलीला देहरादून में पुनर्जीवित की गई। 2024 में आयोजित रामलीला को 55 लाख से अधिक दर्शकों ने विभिन्न माध्यमों से देखा। इस बार महोत्सव में Laser और Sound Show का विशेष आयोजन होगा, जिससे गढ़वाल के इतिहास को भव्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को मनोरंजन के साथ-साथ अपने इतिहास और सनातन संस्कृति से जुड़ने का अवसर देगी।
रामलीला के मंचन के अलावा, उत्तराखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति को भी महोत्सव में विशेष स्थान मिलेगा। प्रदेशभर के कलाकार अपनी कला की छटा बिखेरेंगे, वहीं भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दर्शकों को आकर्षित करेंगी।
भव्य आयोजन की झलकियाँ
संरक्षक बछेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि इस वर्ष की स्मारिका पुस्तिका अतीत और वर्तमान का संगम होगी। महोत्सव के अंतर्गत 19 सितंबर से भव्य मेला लगेगा, 20 सितंबर को घंटाघर से मैदान तक विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी और 2 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण, मेघनाथ तथा लंका का पारंपरिक पुतला दहन किया जाएगा।
पहली बार डिजिटल लाइव टेलीकास्ट
उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार Digital Live Telecast System के जरिए रामलीला मंचन 75 लाख से अधिक दर्शकों तक पहुंचेगा। बड़े डिजिटल स्क्रीन और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह आयोजन दर्शकों को नए अनुभव से जोड़ेगा।
कलाकारों में देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, ऋषिकेश सहित विभिन्न क्षेत्रों की रामलीलाओं से जुड़े अनुभवी कलाकार शामिल होंगे। साथ ही, गढ़वाली फिल्मों की मशहूर गायिकाएं—“रेशमी रुमाला” फेम बबली सकलानी, “बिचला गाउं की दिचला” फेम कंचन भंडारी और “कान्हा रे कान्हा” फेम पूनम सकलानी भी मंच पर अभिनय करेंगी।
सांस्कृतिक विरासत का उत्सव
अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि चौपाई, कथा, संवाद और मंचन सभी गढ़वाल की 1952 से चली आ रही प्राचीन रामलीला परंपरा के अनुरूप होंगे। इससे गढ़वाल के लोगों का अपनत्व देहरादून में भी जीवित रहेगा। उन्होंने बताया कि इस रामलीला का उद्देश्य केवल मंचन नहीं बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम प्रस्तुत करना है।
प्रेस वार्ता में सचिव अमित पंत, नई टिहरी रामलीला समिति अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल, गिरीश पैन्यूली, दुर्गा भट्ट, अजय पैन्यूली, शशि पैन्यूली, पूनम सकलानी, कंचन भंडारी, गंगा डोगरा, अमित बहुगुणा, तपेंद्र चौहान, शिवम गिरी सहित कई पदाधिकारी व कलाकार उपस्थित रहे।








