रामगढ़ कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन की बैठक डॉ. शारदा प्रसाद की अध्यक्षता में शांतिधारा बुक ट्रस्ट के पुस्तकालय में आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य रूप से झारखंड की संस्कृति एवं भाई बहन का प्रेम और प्रकृति पर्व “करम परब”
पर परिचर्चा की गई।
सर्वप्रथम संस्थापक अध्यक्ष सुरेश पी अग्रवाल के द्वारा सभी का स्वागत व अभिनंदन किया गया। सचिव, प्रो. प्रणीत कुमार ने पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों को सभी के सामने प्रस्तुत किया तथा उसकी संपुष्टि की गई।
डॉ शारदा प्रसाद ने भारत और मॉरीशस की संस्कृति पर प्रकाश डाला। जिस प्रकार भारतवर्ष में श्री गणेश पूजा श्रद्धा, भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया जाता है उसी प्रकार मॉरीशस में भी पूरी श्रद्धा और भक्ति से गणेशोत्सव मनाया जाता है। उन्होंने मारीशस में “करम परब” और झारखंड की संस्कृति के बारे में बताया। “करम परब” वहां के लिए बिल्कुल नया और अनोखा पर्व था, जिसकी सभी ने सराहना की। इसके बाद डा. शारदा ने करम पर्व पर अपनी कविता: “भादो माह शुक्ल एकादशी करम परब लेकर आया, हरियर करम डाल ले भाई आया, बहना का मन हरसाया” सुनाई। । सुरेश पी अग्रवाल ने कहा कि झारखंड उत्सव धर्मी राज्य है और यहां प्रकृति से जुड़े सभी पर्व करमा, सरहुल इत्यादि मनाया जाते हैं।
प्रो. प्रणीत कुमार और डॉ. ताराशंकर अग्रवाल ने भी झारखंड की संस्कृति के विषय में अपने विचार व्यक्त किये। कहा कि आज हमें प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन करना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। डॉ उमा सेन ने भी करमा पर्व से संबंधित अपने अनुभव साझा किये, कहा कि पर्व- त्योहार हमारे जीवन की एकरसता को दूर करने में सहायक होते हैं और करमा पर्व तो झारखंड का सामासिक पर्व है, जिसे सभी लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तारा शंकर अग्रवाल ने किया।
डॉ शारदा प्रसाद ने अपनी नवीनतम पुस्तक “गुलमोहर-सी जिंदगी” और “साहित्य के सामाजिक परिदृश्य” तथा “ज्ञान स्पंदन” पत्रिका की प्रतियां शांतिधारा बुक ट्रस्ट को प्रदान कीं।








