देहरादून। एक बेटी के लिए पिता केवल उसका संसार नहीं होता, बल्कि उसके जीवन की वह मजबूत बुनियाद होता है जिस पर उसके आदर्शों का महल खड़ा होता है। पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के महाप्रयाण पर उनकी पुत्री और उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण का छलका दर्द इसी शाश्वत सत्य को बयां करता है।
अपने भावुक श्रद्धांजलि संदेश में उन्होंने गहरे एकाकीपन को व्यक्त करते हुए लिखा कि आज उनके पास अपने मार्गदर्शक और संबल को विदा करने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं। जनरल खंडूड़ी ने अपनी संतान को केवल जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उसे गरिमा और सत्यनिष्ठा के साथ जीने के संस्कार भी दिए।
इस संदेश ने एक सैनिक के परिवार के उस मौन संघर्ष को भी उजागर किया है, जो देश सेवा के पीछे कहीं छिप जाता है। सीमाओं पर तैनात पिता की सलामती के लिए परिवार ने हमेशा एक अदृश्य युद्ध लड़ा, जहां बचपन का स्नेह सिर्फ चिट्ठियों के पन्नों में सिमटा रहता था।
ऋतु खंडूड़ी के शब्द याद दिलाते हैं कि जनरल खंडूड़ी एक ऐसे संवेदनशील लेकिन अडिग इंसान थे, जिन्होंने सिखाया कि सार्वजनिक जीवन में फैसले लोगों को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि समाज के हित में सही होने के लिए लिए जाते हैं। पद तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन इंसान की असली पहचान उसके आचरण और मूल्यों से ही बनती है। पिता को खोने की यह व्यक्तिगत क्षति आज पूरे उत्तराखंड की सामूहिक संवेदना बन चुकी है।








