---Advertisement---

नहीं रहे भुवन चंद्र खंडूड़ी उनका फौजी से CM तक का सफर

देहरादून। एक फौजी, जिसने 35 साल भारतीय सेना में बिताए। मेजर जनरल के रैंक तक पहुंचे। रिटायरमेंट के बाद सोचा होगा… अब देश की सेवा राजनीति से करेंगे। और फिर जुड़ गए बीजेपी से।
गढ़वाल से सांसद बने। केंद्र में मंत्री बने। हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स संभाले। सबकुछ ठीक चल रहा था।
फिर मौका मिला, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनने का।
खंडूड़ी जी ने मुख्यमंत्री बनते ही क्या किया जानते हैं सिस्टम को साफ किया। अनुशासन लाने की कोशिश की। भ्रष्टाचार पर हाथ कसा। अफसरों से सवाल पूछने शुरू किए।
बहरहाल, इससे लोग खुश हुए… लेकिन कुछ लोग बेहद नाराज़ भी।
कुछ अफसर… कुछ ठेकेदार… और कुछ तो खुद पार्टी के अंदर के लोग।
खंडूड़ी ने सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े फैसले लिए। पहाड़ों में कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम किया। जमीन खरीद पर सख्त नियम लागू किए, ताकि बाहरी लोग उत्तराखंड की ज़मीन पर कब्जा न जमा सकें।
पर जिस शख्स को ईमानदारी और अनुशासन के लिए जाना जाता था… उसे ही बीजेपी ने एक झटके में मुख्यमंत्री पद से हटा दिया
पार्टी ने कोई साफ कारण नहीं बताया। बस इतना कहा गया “पार्टी हित में बदलाव जरूरी था।”
हलांकि खंडूड़ी को दोबारा मौका मिला। वो फिर से मुख्यमंत्री बने। लेकिन… फिर वही कहानी दोहराई गई। सख्त फैसले… पार्टी में असंतोष… और फिर से हटा दिया गया।
फिलहाल राजनीति में जहां नेता अपनी छवि बनाने के लिए करोड़ों खर्च करते हैं, वहीं खंडूड़ी को आज भी लोग उनके काम और अनुशासन के लिए याद करते हैं। एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसने सत्ता को सुविधा नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी समझा, आगे भी वो इसी रुप में याद किए जाएंगे

Related Post

LATEST Post

---Advertisement---