देहरादून। Shri Digambar Jain Swadhyay Bhavan में पूज्य गुरुदेव Kanji Swami का 137वां उपकार दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में भक्ति, ज्ञान और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में पद्मश्री Dr. R. K. Jain, सुनील जैन, विनोद जैन, राजीव जैन, इंद्राणी पांधी और प्रवीण जैन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सुबह श्रद्धालुओं ने सरनीमल मंदिर में जिनेंद्र पूजन में भाग लिया, जिसके बाद गुरुदेव श्री कानजी स्वामी का मंगलमय सीडी प्रवचन श्रवण किया गया।
इसके बाद वीतराग विज्ञान पाठशाला की संरक्षिका वीना जैन के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में बच्चों और श्रद्धालुओं द्वारा प्रस्तुत गुरुदेव वंदना, नाटक, कव्वाली और भक्ति गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। “जागो चेतन जागो”, “जय समयसार”, “तू ही शुद्ध है, तू ही बुद्ध है” और “गुरुदेव आए रे बड़े ही सौभाग्य से” जैसी प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के जीवन, उनके सिद्धांतों और आत्मजागरण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में पंच परमेष्ठी वंदना, जिनेंद्र पूजन और धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर वीना जैन ने कहा कि कानजी स्वामी केवल संत नहीं थे, बल्कि आत्मज्ञान और सम्यक दर्शन की जीवंत प्रेरणा थे। उन्होंने अपने तप, त्याग और गहन अध्ययन से समाज को आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया। उनके विचार आज भी लोगों को सत्य, संयम और आध्यात्मिक चेतना की ओर प्रेरित करते हैं।








