हरिद्वार। Delhi-Dehradun Expressway के शुरू होने के बाद यात्रा तो आसान और तेज हो गई है, लेकिन इसका असर अब हरिद्वार के पर्यटन और स्थानीय व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है। एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली से देहरादून का सफर अब ढाई से तीन घंटे में पूरा हो रहा है, जिसके चलते बड़ी संख्या में यात्री हरिद्वार में रुकने के बजाय सीधे देहरादून और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर निकल रहे हैं।
चारधाम यात्रा के शुरुआती चरण में उत्तराखंड में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है, लेकिन धर्मनगरी Haridwar को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। होटल कारोबारियों, ढाबा संचालकों और ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि इस बार यात्रियों की ठहरने की अवधि काफी कम हो गई है।
होटल व्यवसायी कुलदीप शर्मा के अनुसार शहर के करीब 40 प्रतिशत होटल खाली चल रहे हैं। चारधाम यात्रा सीजन के बावजूद बुकिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पहले यात्री हरिद्वार में एक या दो दिन रुककर गंगा स्नान और मंदिर दर्शन करते थे, लेकिन अब समय बचाने के लिए सीधे आगे बढ़ रहे हैं।
ढाबा संचालक कमल खड़का ने बताया कि अब कारोबार केवल वीकेंड तक सीमित रह गया है। सप्ताह के बाकी दिनों में ग्राहकों की संख्या काफी कम रहती है। वहीं ट्रैवल कारोबारियों ने भी एडवांस बुकिंग और पूछताछ में कमी आने की बात कही है।
व्यापारियों का कहना है कि पहले दिल्ली, नोएडा, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु हरिद्वार में रुकते थे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता था। अब एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्री सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचना पसंद कर रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने सरकार से राहत पैकेज देने, बिजली-पानी और सीवर टैक्स में छूट की मांग की है। उनका कहना है कि हरकी पैड़ी और धार्मिक पर्यटन के कारण हरिद्वार चारधाम यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार रहा है, इसलिए शहर के पर्यटन और व्यापार को बचाने के लिए विशेष योजना बनाई जानी चाहिए।








