ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा व्यवस्था ही सशक्त समाज की आधारशिला है।
उपराष्ट्रपति ने ऋषिकेश को हिमालय का प्रवेश द्वार और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक महत्व वाला क्षेत्र बताते हुए कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गरिमा को और बढ़ाता है। उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका का उल्लेख करते हुए ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल की सराहना की, जिसके माध्यम से 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने इसे “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना का प्रतीक बताया।
स्वास्थ्य अवसंरचना में हुए विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दशक में देशभर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने चिकित्सा शिक्षा और उपचार सुविधाओं को मजबूती दी है। उन्होंने टेलीमेडिसिन जैसी पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पतालों तक सीमित न रखकर दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचाना जरूरी है।
उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान चिकित्सा सेवा, शोध, नवाचार और सामाजिक दायित्व के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन की नई शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।








