---Advertisement---

लैंसडौन वनाग्नि से दहशत में पर्यटक, धुएं से ढका पूरा इलाका

उत्तराखंड में एक बार फिर जंगल धधक उठे हैं। पौड़ी गढ़वाल के लैंसडौन वन प्रभाग में फरसूला गांव के पास लगी भीषण आग ने कुछ ही घंटों में विकराल रूप ले लिया। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती हुई कोटद्वार-लैंसडौन मुख्य मार्ग तक पहुंच गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मंगलवार दोपहर शुरू हुई इस वनाग्नि ने देखते ही देखते फरसूला के नापखेत से उमरीखाल, सकन्याणी और कुठालडांडा तक के जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया। आग से उठते घने धुएं ने पूरी घाटी को ढक लिया, जिसके कारण सड़क पर दृश्यता लगभग शून्य हो गई। हालात इतने खराब हो गए कि कई पर्यटकों और वाहन चालकों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।

वन विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी रहीं। क्रू-स्टेशन की टीमों को आग पर काबू पाने में करीब 12 घंटे से ज्यादा समय लगा। अधिकारियों के मुताबिक इस आग में लगभग चार हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो गया। लैंसडौन के रेंजर राकेश शाह ने बताया कि आग तेज हवाओं के चलते तेजी से फैली, जिससे स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो गई थी।

इधर टिहरी गढ़वाल के गजा क्षेत्र के जंगलों में भी आग की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं ने वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों की शुरुआत में ही जंगलों का इस तरह सुलगना आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय संकट का संकेत है।

वनाग्नि से न केवल पेड़-पौधों और वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में पड़ रहा है। इसके साथ ही स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से जंगलों के आसपास सतर्कता बरतने और आग से बचाव के नियमों का पालन करने की अपील की है।

Related Post

LATEST Post

---Advertisement---