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सिर्फ 7% इथेनॉल और पानी से जलेगा चूल्हा! जानिए कैसे बदलेगी रसोई की तस्वीर

देश में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल आधारित आधुनिक कुक स्टोव का अनावरण किया है। इस नई तकनीक को एलपीजी गैस सिलेंडर का किफायती, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है। पूरी तरह भारत में विकसित यह तकनीक ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह नया चूल्हा भविष्य में घरेलू रसोई की तस्वीर बदल सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए इथेनॉल और पानी के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। बताया जा रहा है कि पानी में केवल 7 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर भी इसे प्रभावी ढंग से जलाया जा सकता है। यह मिश्रण नीली और स्थिर लौ पैदा करता है, जिससे खाना लगभग उसी गति से पकता है जैसे पारंपरिक एलपीजी गैस चूल्हे पर पकता है।

सुरक्षा के लिहाज से भी यह तकनीक काफी बेहतर मानी जा रही है। एलपीजी सिलेंडर की तरह इसमें उच्च दबाव वाली गैस का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे गैस रिसाव या विस्फोट जैसी दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाता है। यही कारण है कि इसे घरेलू उपयोग के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह चूल्हा महत्वपूर्ण है। इसके उपयोग से धुआं और हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे वायु प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। साथ ही सीमित मात्रा में इथेनॉल की खपत होने के कारण इसकी संचालन लागत भी कम रहने की संभावना है। अनुमान है कि इथेनॉल की कीमत 60 से 70 रुपये प्रति लीटर के बीच हो सकती है, जिससे रसोई का मासिक खर्च एलपीजी की तुलना में कम पड़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल आधारित यह तकनीक न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा करेगी। इथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। ऐसे में यह नवाचार भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

 

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