रामगढ़। राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा गुरुवार को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर विशेष व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके संघर्ष, आदिवासी समाज के उत्थान में योगदान तथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका से नई पीढ़ी को परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान शिक्षकों, पदाधिकारियों और विद्यार्थियों ने धरती आबा को श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन साहस, नेतृत्व और समाज सेवा की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने युवाओं से उनके विचारों और संघर्षों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। वहीं विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को देश के महान व्यक्तित्वों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ना भी है।
कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे महानायक थे, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद ब्रिटिश शासन को चुनौती दी और आदिवासी समाज में नई चेतना का संचार किया। कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने उनके योगदान को भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम ने अपने व्याख्यान में कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक जनजातीय नायक नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक अस्मिता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक थे। उन्होंने बताया कि उनका ‘उलगुलान’ आंदोलन जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक था।
कार्यक्रम में वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ममता ने किया तथा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।







