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हिमालयी राज्यों की पहली बड़ी बैठक—धामी बोले, मिलकर बनेगी विकास की नई नीति

हिमालयी राज्यों के बीच समन्वय और साझा विकास को लेकर एक अहम पहल की गई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर हिमालयी राज्यों के समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की पहली बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में क्षेत्रीय विकास को गति देने और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियाँ काफी हद तक समान हैं। ऐसे में आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से अधिक प्रभावी और व्यवहारिक नीतियाँ बनाई जा सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन राज्यों में किसी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हुए हैं, उन्हें ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में अपनाया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास (इकोनॉमी) और पर्यावरण संरक्षण (इकोलॉजी) के बीच संतुलन बनाते हुए लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करना है। उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय और औषधीय संसाधनों के संरक्षण में राज्य के पास अपार संभावनाएं हैं।

जल संरक्षण के विषय पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है और इस दिशा में कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। साथ ही, हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे संस्थानों से सहयोग लेने पर भी बल दिया गया।

बैठक में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन विकास, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में मिले सुझावों पर तेजी से अमल किया जाएगा और भविष्य में विशेषज्ञों के साथ नियमित बैठकें व विचार गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।

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