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दान पेटी विवाद ने खोले कई राज, अयोध्या राम मंदिर में 200 लोगों से पूछताछ की तैयारी

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में दान पेटियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर बीते 11 महीनों में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद सामने आई शिकायतों ने सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) अब केवल कथित चोरी की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सुरक्षा और निगरानी सिस्टम की गहन पड़ताल में जुट गई है।

जांच के दौरान सबसे अधिक चर्चा रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (आरएमओ) की भूमिका को लेकर हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह अधिकारी करीब 17 वर्षों से मंदिर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है और परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों, रिकॉर्डिंग सिस्टम, बैकअप और डेटा संरक्षण की जिम्मेदारी संभालता रहा है। एसआईटी यह जानने का प्रयास कर रही है कि देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक परिसरों में शुमार राम मंदिर में कथित सुरक्षा चूक कैसे हुई और निगरानी तंत्र में कहीं कोई खामी तो नहीं रही।

शुरुआती जांच का फोकस रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर था, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश नियंत्रण, तकनीकी संचालन और प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़े कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि किसी भी संवेदनशील परिसर में हुई घटना की तह तक पहुंचने के लिए पूरी कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक होता है।

सूत्रों के अनुसार, अब तक 125 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि लगभग 200 लोगों से पूछताछ की तैयारी चल रही है। कई कर्मचारियों को दोबारा बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने श्रद्धालुओं के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए सुरक्षा कवच के बावजूद यदि ऐसी घटनाएं सामने आती हैं तो इससे मंदिर की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

 

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