विशेष जरूरतों वाले व्यक्तियों के लिए बेहतर जीवन और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। इस एक दिवसीय संगोष्ठी में समावेशी और टिकाऊ आवासीय देखभाल (असिस्टेड लिविंग) को लेकर विशेषज्ञों ने गहन चर्चा की।
इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) ने इस कॉन्क्लेव में सक्रिय भागीदारी निभाई। संस्था ऑटिज़्म और अन्य विकासात्मक स्थितियों वाले व्यक्तियों के समर्थन के लिए कार्यरत है। कार्यक्रम में ‘सामावेश’ नामक एक नई पहल पर भी प्रकाश डाला गया, जो न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों के लिए भारत का सबसे बड़ा आजीवन आवासीय देखभाल तंत्र बनने की दिशा में विकसित की जा रही है।
कॉन्क्लेव में जयशंकर नटराजन, नीना वाघ, मुग्धा कालरा सहित कई विशेषज्ञों और हितधारकों ने भाग लिया। इस दौरान असिस्टेड लिविंग के संचालन, चुनौतियों और भावनात्मक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
जयशंकर नटराजन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां ऑटिज़्म और अन्य विकासात्मक स्थितियों वाले लोगों के लिए दीर्घकालिक देखभाल की योजना बनाना बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा को देखते हुए मजबूत और टिकाऊ आवासीय देखभाल तंत्र विकसित करना समय की जरूरत है।
कॉन्क्लेव के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए असिस्टेड लिविंग को अधिक प्रभावी और मानवीय बनाने के सुझाव दिए। कार्यक्रम ने विशेषज्ञों, परिवारों और कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में ठोस विचार-विमर्श किया गया।








