देहरादून। उत्तराखंड में स्वच्छता कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय स्थित आपदा निवारण एवं प्रबंधन केंद्र (डीएमएमसी) सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने स्वच्छता कर्मियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान सबसे बड़ा फैसला स्वच्छता कर्मचारियों के बीमा कवर को लेकर लिया गया। उनके जोखिम भरे कार्य को देखते हुए बीमा राशि को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किए जाने पर जोर दिया गया। साथ ही उन्होंने स्वच्छता कर्मियों का वेतन उपनल और पीआरडी कर्मचारियों के समान सुनिश्चित करने की बात भी कही।
मकवाना ने कहा कि स्वच्छता कर्मचारी समाज के लिए बेहद अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके हितों की रक्षा और सुविधाओं में सुधार सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने निकायों में कार्यरत मोहल्ला स्वच्छता समिति के कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, उन्होंने स्वच्छता कर्मियों को श्रम विभाग के अंतर्गत कुशल और अर्ध-कुशल श्रेणी में शामिल करने पर भी बल दिया। मैन्युअल स्कैवेंजिंग से जुड़े कर्मचारियों के सर्वेक्षण को पारदर्शिता और गंभीरता से कराने के निर्देश भी दिए गए।
तकनीकी सुधार की दिशा में एक अहम पहल करते हुए मकवाना ने सीवर लाइन की सफाई के लिए रोबोटिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही और जल संस्थान को इसका डेमो प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
साथ ही, नगर निगम देहरादून द्वारा 715 आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति दिलाने और स्वच्छता कर्मियों के एक लाख रुपये तक के ऋण माफी पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इन फैसलों से स्वच्छता कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।








