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30वें स्थापना दिवस पर संथाल समाज का शक्ति प्रदर्शन, एकता और अधिकारों का गूंजा संकल्प

कुजू। संथाल समाज दिशोम माँझी परगना का 30वाँ स्थापना दिवस समारोह शनिवार को कुजू के मुरपा स्थित अक्षत बैंक्वेट हॉल में उत्साह और गरिमामय माहौल के बीच आयोजित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड सहित ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और असम से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। समारोह में संथाल समाज की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संथाल समाज दिशोम माँझी परगना के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने कहा कि यह संगठन संथाल समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 30-31 मई 1997 को स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि समाज को अपने पूर्वजों से ग्राम सभा, स्वशासन, न्याय व्यवस्था, परंपरागत रीति-रिवाज, सामाजिक आचरण और प्रकृति पूजा जैसी अमूल्य विरासत मिली है, जिसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।

फागु बेसरा ने कहा कि संथाल समाज अपनी पारंपरिक व्यवस्था और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन जीता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244, 244ए तथा पांचवीं और छठी अनुसूची में जनजातीय समुदायों के अधिकारों को विशेष संरक्षण दिया गया है। ऐसे में समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए एकजुट होकर कार्य करना होगा।

उन्होंने समाज के लोगों से भाषा, संस्कृति और धर्म को अक्षुण्ण बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष को और मजबूत किया जाएगा। समारोह में समाज की एकता और संगठन को मजबूत बनाने का भी संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम को दिशोम परगना सोनाराम मांझी, केंद्रीय महासचिव सोनाराम मांझी तथा केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो बास्के सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। समारोह में हीरालाल मांझी, रतीलाल मरांडी, मनोहर मुर्मू, अनिल टुडू, बिरजू सोरेन, अशोक मुर्मू, सूरज बेसरा, विनोद हेंब्रम और सहदेव किस्कू समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एतो बास्के, पन्नालाल मुर्मू, प्रदीप सोरेन और टिरू सोरेन ने संयुक्त रूप से किया।

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