- मिशन 2027 और डैमेज कंट्रोल की जुगलबंदी: नितिन नबीन के दौरे से पहले देहरादून में लिखी गई एकजुटता की नई पटकथा
- धामी-त्रिवेंद्र-बलूनी का नया पावर गेम : खंडूड़ी के अवसान और कांग्रेस के बढ़ते हौसलों के बीच बड़ा सियासी दांव
ममता सिंह, देहरादून।
उत्तराखंड की शांत वादियों में इस समय एक बड़ा सियासी तूफान आकार ले रहा है। राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कशमकश अब कूटनीतिक मुलाकातों के जरिए सतह पर आने लगी है। हाल ही में भाजपा के छह कद्दावर नेताओं के पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल होने की घटना ने संगठन की चूलें हिला दी हैं। इस बड़े झटके से उपजे असंतोष और राजनीतिक असहजता के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सरकारी आवास पर हुई ‘डिनर डिप्लोमेसी’ ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री धामी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और वरिष्ठ सांसद अनिल बलूनी की मौजूदगी रही। यह कोई सामान्य या अनौपचारिक रात्रिभोज नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरे रणनीतिक और राजनीतिक संदेश छिपे हैं।
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर देहरादून पहुंचे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन से ठीक पहले राज्य के इन तीन शीर्ष चेहरों का एक मेज पर बैठना यह साफ संकेत देता है कि प्रदेश नेतृत्व केंद्रीय आलाकमान को यह दिखाना चाहता है कि राज्य में सब कुछ नियंत्रण में है।
हाल ही में उत्तराखंड के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूड़ी के निधन के बाद राज्य भाजपा एक भावुक और वैचारिक शून्यता से गुजर रही है। ऐसे संवेदनशील समय में विपक्षी कांग्रेस के बढ़ते हौसलों और पार्टी के भीतर जारी गुटीय खींचतान को थामना मुख्यमंत्री धामी के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। यही कारण है कि इस डिनर के जरिए ‘डैमेज कंट्रोल’ और ‘पावर बैलेंस’ यानी शक्ति संतुलन की दोहरी रणनीति पर काम किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह बैठक आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एक नए ‘त्रिकोण’ का उदय है। इस त्रिमूर्ति के पास पार्टी को संकट से उबारने के तीन अलग-अलग अस्त्र हैं। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पास लंबा प्रशासनिक और सांगठनिक अनुभव है, जो कैडर को बांधकर रखने में सक्षम है। वरिष्ठ सांसद अनिल बलूनी की दिल्ली दरबार यानी केंद्रीय आलाकमान में सीधी और मजबूत पकड़ है, जो राज्य और केंद्र के बीच सेतु का काम करते हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऊर्जावान और युवा चेहरा एंटी-इंकंबेंसी को मात देने के लिए पार्टी का सबसे बड़ा ब्रांड है। इन तीनों ताकतों का एक साथ आना सामूहिक नेतृत्व का एक मजबूत संदेश देता है।
उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां सत्ता विरोधी लहर और आंतरिक भितरघात हमेशा हावी रहे हैं। अगर भाजपा को 2027 में दोबारा सत्ता का स्वाद चखना है, तो उसे अपने घर को दुरुस्त करना ही होगा। इस ‘डिनर डिप्लोमेसी’ की गंभीरता को इसी बात से समझा जा सकता है कि यहां केवल भोजन पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि उन कमियों को दूर करने की रूपरेखा तैयार की गई जिसकी वजह से नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।
बहरहाल, बिल्कुल साफ हैं, यदि भाजपा को उत्तराखंड में अपना मजबूत किला बचाना है, तो उसे अपने आंतरिक मतभेदों को हमेशा के लिए दफन करना होगा। मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक चली यह कूटनीतिक चर्चा आने वाले दिनों में न केवल राज्य सरकार बल्कि संगठन की नई दशा और दिशा भी तय करने वाली है।
उत्तराखंड भाजपा के संकटमोचक बनेंगे नितिन नबीन?
प्रदेश दौरा शुरू , डैमेज कंट्रोल और बगावत को थामने पर रहेगा जोर
भाजपा अध्यक्ष के सामने कांग्रेस के बढ़ते हौसलों को पस्त करने की भी चुनौती
देहरादून। भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का आज से शुरू हो रहा तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा संगठन के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य भाजपा अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। हाल ही में पार्टी के छह कद्दावर नेताओं का एक साथ कांग्रेस में शामिल होना और पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूड़ी के निधन से पैदा हुई वैचारिक शून्यता ने प्रदेश इकाई को बैकफुट पर ला दिया है। ऐसे में नितिन नबीन के सामने न सिर्फ नाराज कैडर को संभालना है, बल्कि विपक्षी कांग्रेस के बढ़ते हौसलों को पस्त करने की भी बड़ी चुनौती है।
देहरादून पहुंचते ही शुरू होने वाला बैठकों का दौर विशुद्ध रूप से ‘डैमेज कंट्रोल’ और ‘पावर बैलेंस’ पर केंद्रित रहेगा। विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुख्य फोकस मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के युवा चेहरे की ब्रांडिंग को बनाए रखते हुए वरिष्ठ नेताओं और असंतुष्ट गुटों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।








