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दून यूनिवर्सिटी में ‘माया क्षेत्र’ प्रदर्शनी, कैसे दिखी हरिद्वार-ऋषिकेश की विरासत?

देहरादून। Doon University में आयोजित प्रदर्शनी “माया क्षेत्र: समय वार्ता” ने हरिद्वार-ऋषिकेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को एक नए अंदाज में प्रस्तुत किया। 2 मई 2026 को स्कूल ऑफ डिज़ाइन के पीपल लैब द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, University of Delhi के रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता और उप-रजिस्ट्रार (वित्त) शरद कुमार संत ने किया।

यह प्रदर्शनी डॉ. धृति धौंडियाल और सुकल्प डबराल के मार्गदर्शन में तैयार की गई, जिसमें स्कूल ऑफ डिज़ाइन के 2024 बैच के छात्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रदर्शनी का मुख्य विषय ‘समय वार्ता’ यानी समय के साथ संवाद है, जिसके माध्यम से Haridwar और Rishikesh क्षेत्र के ऐतिहासिक विकास को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनी में ‘माया क्षेत्र’ की अवधारणा को केंद्र में रखा गया है, जिसे प्राचीन ग्रंथों में हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र के लिए प्रयोग किया गया है। इसमें दृश्य और स्थानिक व्याख्याओं के जरिए इस क्षेत्र की सांस्कृतिक यात्रा, परंपराओं और ऐतिहासिक परिवर्तनों को दर्शाया गया है।

आयोजकों के अनुसार, इस प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल इतिहास को दिखाना नहीं, बल्कि लोगों को इस विरासत से जोड़ना और उसके महत्व को समझाना भी है। प्रदर्शनी में विभिन्न कलात्मक माध्यमों का उपयोग कर अतीत और वर्तमान के बीच एक संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना, बल्कि दर्शकों को भी उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को करीब से जानने का मौका मिला। प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि समय के साथ बदलते हुए भी परंपराएं और संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़ी रहती हैं।

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