चारधाम यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और तथ्यहीन सूचनाओं पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने ऐसे मामलों में निगरानी बढ़ाते हुए 24×7 सोशल मीडिया मॉनिटरिंग शुरू कर दी है, ताकि अफवाह फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
हाल ही में जनपद रुद्रप्रयाग में इस तरह की भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में दो और प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही अब तक कुल तीन मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि चारधाम यात्रा जैसी संवेदनशील धार्मिक यात्रा के दौरान अफवाहें फैलाना न केवल व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि श्रद्धालुओं में अनावश्यक भय और भ्रम भी पैदा करता है।
मॉनिटरिंग के दौरान कुछ वीडियो और रील्स सामने आए, जिनमें केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं को लेकर गलत और भ्रामक दावे किए गए। इन वीडियो में यह दिखाने की कोशिश की गई कि श्रद्धालुओं को बिना दर्शन कराए वापस भेजा जा रहा है, या उन्हें 15-15 घंटे तक कतार में खड़े रहने के बावजूद दर्शन नहीं मिल पा रहे हैं।
इसके अलावा कुछ पोस्ट्स में पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अव्यवस्था, धक्का-मुक्की और भीड़ प्रबंधन में कमी जैसी बातें भी कही गईं, जिन्हें प्रशासन ने पूरी तरह निराधार बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें और किसी भी अपुष्ट खबर को साझा करने से बचें।








