---Advertisement---

दून पुस्तकालय केंद्र में युवाओं को मिला वित्तीय साक्षरता का नया दृष्टिकोण

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में मंगलवार को युवाओं के लिए एक विशेष *वित्तीय साक्षरता सत्र* आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक चला और इसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और अध्यापकों ने हिस्सा लिया। इस सत्र का संचालन *सेबी-प्रमाणित प्रतिभूति बाजार प्रशिक्षक डॉ. सुनील मदान* ने किया।

डॉ. मदान ने सत्र के दौरान “जीवन लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार का निर्माण” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को वित्तीय साक्षरता के छह प्रमुख स्तंभों से अवगत कराया। इनमें *ज़रूरतें बनाम चाहत*, *50-30-20 नियम*, *निवेश के सिद्धांत*, *म्युचुअल फंड और उनके लाभ*, और *बाजार में धोखाधड़ी से बचाव* जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे।

उन्होंने युवाओं को यह समझाया कि अपने वित्त का समझदारी से प्रबंधन कैसे किया जाए, भविष्य की योजनाओं को कैसे व्यवस्थित किया जाए और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सूचित निवेश निर्णय कैसे लिए जाएं। प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान और ऐसे उपकरण प्रदान किए गए, जिनसे वे आर्थिक दृष्टि से मजबूत बन सकें।

यह कार्यक्रम *सभी के लिए निःशुल्क* था। दून पुस्तकालय द्वारा बताया गया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं और आम लोगों में वित्तीय जागरूकता बढ़ाना और उन्हें जिम्मेदार निवेशक बनाना है। यह कार्यक्रम *नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)* की देशव्यापी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे भारत में वित्तीय साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है।

सत्र के दौरान छात्रों ने सवाल-जवाब के जरिए अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी पाया। उल्लेखनीय है कि डॉ. सुनील मदान को *कॉर्पोरेट और शिक्षा क्षेत्र* में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अब तक 100 से ज्यादा वित्तीय साक्षरता कार्यशालाएं आयोजित की हैं और कई शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट *चंद्रशेखर तिवारी* ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. वी.बी. चौरसिया, विनोद सकलानी, सुंदर सिंह विष्ट, शुभम ममगाईं, अंकिता, जगदीश सिंह महर, राकेश कुमार अवतार सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-शिक्षक मौजूद रहे।

 

Related Post