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रेसकोर्स की गलियों में क्यों गूँज रहे थे ‘नशे को ना’ के नारे?

देहरादून। उत्तराखंड महिला मंच ने रविवार को देहरादून के रेसकोर्स क्षेत्र में नशा विरोधी जन-जागरूकता रैली निकाली। इस रैली का उद्देश्य समाज को नशे के खतरों से सचेत करना और क्षेत्र में फैले नशा कारोबार के खिलाफ आवाज उठाना था। रैली ट्रांजिट कैंप से शुरू होकर रेसकोर्स क्षेत्र के कई ब्लॉकों और रेलवे लाइन से सटी बस्तियों तक पहुंची। इस दौरान नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों से संवाद किया गया और नशा व्यापार की वास्तविक स्थिति पर चर्चा हुई।

जनसभा में कई लोगों ने खुलकर बताया कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही है। खासतौर पर रेलवे लाइन से लगी बस्तियों में युवाओं का भविष्य नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत ने कहा कि अब तक कई युवाओं की मौत हो चुकी है और इस कारोबार के खिलाफ बोलने वालों को धमकाया जाता है या उन पर हमला तक किया जाता है।

‘नशे को ना’ अभियान से जुड़े इप्टा के हरिओम पाली ने कहा कि क्षेत्र के लोग डर और असुरक्षा में जी रहे हैं। उनका आरोप है कि नशा तस्करों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। पुलिस को सभी नशा बेचने वालों की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती। कभी-कभी छिटपुट कार्रवाई होती भी है तो आरोपी जल्द ही छूट जाते हैं और शिकायत करने वालों को सजा के रूप में मारपीट का सामना करना पड़ता है।

इंसानियत मंच के तुषार रावत ने भी स्थानीय जनता की पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि लोग नेताओं और पुलिस दोनों से उम्मीद छोड़ चुके हैं। जब-जब लोग शिकायत लेकर जाते हैं, उन्हें आश्वासन मिलता है लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने तो सीधे तौर पर पुलिस, नशा तस्करों और स्थानीय पार्षदों के गठजोड़ का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इस धंधे से होने वाली कमाई ऊपर तक पहुंच रही है, इसलिए खुलेआम नशा बेचा जा रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए, तो महिलाएं खुद तस्करों से निपटने को बाध्य होंगी।

इस रैली में उत्तराखंड महिला मंच के साथ इप्टा, इंसानियत मंच और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। चंद्रकला, भुवनेश्वरी कठैत, विजय नैथानी, डॉ. रवि चोपड़ा, नंदन पांडेय, त्रिलोचन भट्ट, सतीश धौलाखंडी, कमलेश खंतवाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।

रैली के माध्यम से महिलाओं और जनसंगठनों ने प्रशासन और शासन को स्पष्ट संदेश दिया कि नशे के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।

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