देहरादून। भारत के पहले लेखक गांव में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने लेखक गांव में संचालित साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया तथा इसकी अनूठी अवधारणा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां स्थापित नालंदा पुस्तकालय प्राचीन भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अपने दौरे के दौरान शिक्षा मंत्री ने भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने लेखक गांव परिसर में स्थित नालंदा पुस्तकालय, शोध एवं अनुसंधान केंद्र, अटल प्रेक्षागृह, संजीवनी वाटिका, जैन वाटिका तथा नवग्रह एवं नक्षत्र वाटिकाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां उपलब्ध अध्ययन सामग्री, शोध सुविधाओं और ज्ञान-विस्तार से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की।
मदन दिलावर ने कहा कि लेखक गांव केवल एक साहित्यिक केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और बौद्धिक चिंतन का जीवंत मंच बनकर उभरा है। उन्होंने नालंदा पुस्तकालय की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उत्कृष्ट प्रयास है।
इस अवसर पर लेखक गांव के संस्थापक एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने लेखक गांव की स्थापना, उद्देश्यों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह केंद्र साहित्यकारों, शोधार्थियों, कलाकारों और चिंतकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां रचनात्मकता और ज्ञान का निरंतर विस्तार हो रहा है।
कार्यक्रम में लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक, सनराइज अकादमी की प्रबंध निदेशक पूजा पोखरियाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओ.पी. बड़ोनी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने लेखक गांव को भारतीय संस्कृति, साहित्य और शोध के संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।








