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‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर कांग्रेस का सवाल, आखिर 1.73 लाख हेक्टेयर वन भूमि किसे मिली?

 रांची। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने भाजपा पर पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़ी मात्रा में वन भूमि को गैर-वन कार्यों के लिए स्वीकृति दी जा रही है।

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विजय शंकर नायक ने कहा कि यदि सरकार नागरिकों से एक पेड़ लगाने की अपील करती है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच 1.73 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को गैर-वन कार्यों के लिए किस आधार पर स्वीकृति दी गई। उन्होंने दावा किया कि इस भूमि का उपयोग खनन, औद्योगिक परियोजनाओं, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों के लिए किया गया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगलों, वन्य जीवों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर जंगलों पर बढ़ते दबाव का सबसे अधिक असर आदिवासी और मूलवासी समुदायों पर पड़ रहा है, जिनका जीवन जल, जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ है।

विजय शंकर नायक ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में जंगलों की कटाई होती है तो केवल पेड़ ही नहीं हटते, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराएं और आजीविका के साधन भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार पिछले दस वर्षों में उद्योगों को हस्तांतरित की गई वन भूमि, काटे गए पेड़ों की संख्या, विस्थापित परिवारों और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करे।

कांग्रेस ने हसदेव, महान, अरावली, देहिंग पटकाई और ग्रेट निकोबार सहित विभिन्न क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल प्रतीकात्मक अभियानों से आगे बढ़कर जंगलों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर ध्यान देना आवश्यक है।

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