हाल ही में अफगानिस्तान से लेकर भारत तक महसूस किए गए भूकंप के झटकों ने एक बार फिर लोगों के बीच दहशत पैदा कर दी है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में अचानक धरती हिलने लगी, जिससे लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह रही कि इस भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली।
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में जमीन के लगभग 175 किलोमीटर नीचे बताया गया है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.9 मापी गई। गहराई अधिक होने के कारण इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन इसके झटके जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए।
इससे पहले तिब्बत क्षेत्र में भी हल्के झटके महसूस किए गए थे, जिसकी तीव्रता 3.2 दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय है, जहां समय-समय पर धरती का कंपन सामान्य घटना है।
भूकंप की घटनाओं का इतिहास देखें तो पिछले वर्षों में म्यांमार और थाईलैंड में आए शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। रिक्टर स्केल पर 7.9 तीव्रता वाले उस भूकंप के कारण कई इमारतें और पुल ध्वस्त हो गए थे, जबकि हजारों लोग प्रभावित हुए थे। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी झटके महसूस किए गए थे, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी।
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड में भी भूकंप के झटके समय-समय पर महसूस किए जाते हैं। दिल्ली-एनसीआर भूकंपीय जोन-4 में आता है, जो मध्यम से उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। यही कारण है कि यहां समय-समय पर झटके महसूस होते रहते हैं।
भूकंप पृथ्वी के भीतर ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण उत्पन्न होता है, जिससे भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं और धरती हिलने लगती है। इसका मापन सीस्मोग्राफ नामक यंत्र से किया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 3 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप सामान्यतः महसूस नहीं होते, जबकि 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप भारी तबाही ला सकते हैं।
भूकंप के झटके कभी-कभी भूस्खलन, इमारतों के गिरने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं को भी जन्म दे सकते हैं। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में इसका खतरा अधिक रहता है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। मजबूत भवन निर्माण, आपदा प्रबंधन की तैयारी और समय पर सावधानी ही इस प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को कम कर सकती है।








