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ब्रह्माकुमारीज़ रिट्रीट में देशभर के राजा-महाराजा क्यों हुए एकत्र?

माउंट आबू (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ के शांतिवन मुख्यालय में आयोजित **दो दिवसीय रॉयल फैमिली स्प्रीचुअल रिट्रीट** में देशभर के शाही परिवारों के राजा-महाराजा, महारानियां और युवराज शामिल हुए। “अवेकनिंग द इनर सॉवरेन” विषय पर आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन का शुभारंभ पुष्पवर्षा और पारंपरिक राजस्थानी पगड़ी पहनाकर शाही अंदाज में स्वागत के साथ हुआ।

रिट्रीट के दौरान शाही परिवारों ने शाही बग्घी में बैठकर संस्थान के **सोलार किचन, सोलार थर्मल पावर प्लांट और शांतिवन परिसर** का भ्रमण किया। उद्घाटन सत्र में ब्रह्माकुमारीज़ की मुख्य प्रशासिका **राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी** ने कहा कि जीवन का असली उद्देश्य सेवा और परमात्मा की याद है। अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका **बीके जयंती दीदी** ने कहा कि भारत जल्द ही स्वर्णिम युग में प्रवेश कर विश्वगुरु बनेगा।

इस अवसर पर बीके मुन्नी दीदी और महासचिव **डॉ. बीके मृत्युंजय भाई** ने भी अपने विचार रखे। उदयपुर के महाराजा **विश्वराज सिंह बहादुर** ने कहा कि उनका राजघराना 1937 से संस्थान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान का मेल समाज को नई दिशा दे सकता है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा-अंबिकापुर के महाराज और पूर्व उपमुख्यमंत्री **त्रिभुनानेश्वर शरण सिंह देव** ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ परिवार युवाओं को नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षा देने में सराहनीय कार्य कर रहा है। उनके साथ युवराज आदितेश्वर शरण सिंह देव भी मौजूद रहे।

इस रिट्रीट में महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल और ओडिशा सहित कई राज्यों के शाही परिवारों ने भाग लिया। प्रमुख प्रतिभागियों में जोधपुर के **महाराजा गज सिंह**, भरतपुर की **महारानी दिव्या सिंह और युवराज अनिरुद्ध सिंह**, दतिया के **महाराज लोकेंद्र सिंह जूदेव**, राजपिपला के **युवराज मानवेंद्र सिंह गोहिल**, रामपुर के **नवाब काज़िम अली खान** सहित दर्जनों शाही हस्तियां शामिल हुईं।

इस आयोजन ने न सिर्फ शाही परिवारों को अध्यात्म से जोड़ा बल्कि समाज को संदेश दिया कि जीवन का वास्तविक धन आत्मिक शांति और मूल्यनिष्ठ जीवन है।

 

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