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राजनीति के हाईवे पर ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ क्यों बना सबसे बड़ा मंत्र?

भारतीय राजनीति का परिदृश्य आज किसी व्यस्त और जोखिमभरे महामार्ग से कम नहीं रह गया है, जहां “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी” केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सत्ता में बने रहने का मूल मंत्र बन चुका है। व्यंग्यकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने अपने लेख में इसी राजनीतिक यथार्थ को तीखे और रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया है।

लेख में गठबंधन राजनीति को ‘शेयरिंग ऑटो’ से तुलना करते हुए बताया गया है कि इसमें जितने दल होते हैं, उतनी ही दिशाओं में खिंचाव भी होता है। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जैसे ही ढील देते हैं, सहयोगी दल स्टीयरिंग अपने हाथ में लेने को तैयार बैठे रहते हैं। राजनीति में यह दुर्घटना सड़क हादसा नहीं, बल्कि बहुमत टूटने का संकेत है।

सोशल मीडिया को लेख में राजनीति का सबसे खतरनाक ‘ब्लैक स्पॉट’ बताया गया है। वर्षों पुराने ट्वीट, वीडियो और बयान अचानक सामने आकर नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचा देते हैं। आज नेता विपक्ष से कम, अपने पुराने बयानों से ज्यादा डरते हैं। एक स्क्रीनशॉट कभी भी राजनीतिक करियर की रफ्तार रोक सकता है।

व्यंग्य में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ को सत्ता की इमरजेंसी लैंडिंग बताया गया है, जहां संकट आते ही विधायक फाइव स्टार होटलों में पहुंचा दिए जाते हैं। वहां मोबाइल बंद, संपर्क सीमित और नजरबंदी जैसी स्थिति बन जाती है, ताकि दलबदल की दुर्घटना टाली जा सके।

चुनावी मंचों पर किए जाने वाले बड़े-बड़े वादों को ‘जुमलों की ओवरस्पीडिंग’ कहा गया है। चुनाव जीतने के बाद यही वादे नेताओं के लिए स्पीड ब्रेकर बन जाते हैं, जब जनता उनसे जवाब मांगती है।

लेख का निष्कर्ष साफ है—राजनीति के इस हाईवे पर वही सुरक्षित है जो हर मोड़ पर चौकन्ना रहे। यहां जरा सी चूक नेता को इतिहास के हाशिए पर पहुंचा सकती है।

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