दशहरा तक मिल सकता है भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, सिन्हा या प्रधान पर नजर
-ममता सिंह, नई दिल्ली।
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। लंबे समय से अटकलों का बाजार गर्म था, लेकिन अब संघ प्रमुख मोहन भागवत के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अध्यक्ष चयन की कमान पूरी तरह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। इसका अर्थ है कि भाजपा को इस मुद्दे पर संघ की ओर से किसी तरह का दबाव या अड़चन नहीं झेलनी होगी।
दरअसल, मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल करीब दो साल पहले समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्हें लगातार एक्सटेंशन दिया जा रहा था। उनके नेतृत्व में भाजपा ने कई महत्वपूर्ण चुनावों में सफलता पाई, लेकिन अब पार्टी और संगठन दोनों मान रहे हैं कि नया नेतृत्व सामने लाना आवश्यक है। यही कारण है कि दशहरा तक नए अध्यक्ष की घोषणा होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
संघ का सर्वे और कार्यकर्ताओं की नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, संघ ने हाल ही में छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में एक बड़ा सर्वे कराया था। इसमें भाजपा की जमीनी स्थिति और कार्यकर्ताओं की राय को समझने की कोशिश की गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि कई कार्यकर्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन आगामी चुनावों के दौरान *अवकाश पर चले जाएंगे*। इसका सीधा अर्थ है कि वे बूथ स्तर पर मतदाताओं को सक्रिय करने और चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे।
संघ के लिए यह संकेत बेहद गंभीर थे। क्योंकि कार्यकर्ताओं की सक्रियता ही भाजपा की चुनावी सफलता की रीढ़ मानी जाती है। बिहार को भी सर्वे में शामिल किया गया, जहां इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा लगातार बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। ऐसे में कार्यकर्ताओं की उदासीनता पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।
भागवत का बयान और भाजपा को मिली छूट
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में अपने बयान में स्पष्ट कहा था कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना संघ का काम होता तो यह प्रक्रिया इतनी देर नहीं होती। उनके इस बयान को इस रूप में देखा गया कि अब संघ इस विषय से पूरी तरह अलग हो चुका है। अब नए अध्यक्ष के चयन का जिम्मा केवल भाजपा नेतृत्व पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ के हाथ पीछे खींचने की मुख्य वजह यही सर्वे रिपोर्ट है। संगठन चाहता है कि भाजपा खुद अपने अध्यक्ष का चयन करे ताकि कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम हो और वे पूरी ऊर्जा के साथ चुनावों में जुटें।
किस पर बन सकती है सहमति?
अब सवाल उठ रहा है कि भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा। इस समय दो नाम प्रमुखता से उभर रहे हैं—जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। दोनों ही अनुभवी और मजबूत छवि वाले नेता माने जाते हैं। मनोज सिन्हा को संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक सादगी के लिए जाना जाता है, वहीं धर्मेंद्र प्रधान की गिनती जमीनी और कर्मठ नेताओं में होती है, जिनकी पकड़ पूर्वी भारत में मजबूत है।
हालांकि, पार्टी पुराने नामों में से भी किसी पर भरोसा जता सकती है। लेकिन इस बार यह लगभग तय माना जा रहा है कि दशहरा तक नए अध्यक्ष का नाम घोषित कर दिया जाएगा।
2029 चुनाव की तैयारी में अहम भूमिका
भाजपा के लिए नया अध्यक्ष सिर्फ एक पद भर नहीं है, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों का सूत्रधार भी होगा। मौजूदा समय में विपक्षी दल लगातार एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा को अपने संगठन को और मजबूत करना होगा। नया अध्यक्ष कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने, संगठन को मजबूती देने और चुनावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
संघ के फ्री हैंड देने के बाद अब गेंद पूरी तरह भाजपा के पाले में है। पार्टी नेतृत्व जल्द ही अध्यक्ष का चयन कर सकता है। अगर दशहरा तक यह फैसला हो जाता है, तो बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में उत्साह लौट आएगा और भाजपा को चुनावी मैदान में बढ़त मिल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि भाजपा अपने भविष्य के कप्तान के रूप में किसे चुनती है।








