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थायरॉइड वालों के लिए वरदान है सिंघाड़ा? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया चौंकाने वाला कनेक्शन

सर्दियों के मौसम में बाजारों में नजर आने वाला सिंघाड़ा सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद खास माना जाता है। यह फल औषधीय गुणों से भरपूर है और आयोडीन, पोटैशियम, मैंगनीज, फाइबर और कई जरूरी विटामिन्स का प्राकृतिक स्रोत है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंघाड़ा थायरॉइड से लेकर पाचन तंत्र तक शरीर के कई अहम कार्यों को सपोर्ट करता है।

सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने हाल ही में सिंघाड़े के एक खास स्वास्थ्य लाभ की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने बताया कि सिंघाड़ा देखने में थायरॉइड ग्लैंड जैसा होता है और इसके पोषक तत्व भी थायरॉइड के सही कामकाज में मदद करते हैं। सिंघाड़े में मौजूद आयोडीन थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक होता है, जबकि मैंगनीज और पोटैशियम हार्मोन टी4 को सक्रिय टी3 में बदलने में सहायक भूमिका निभाते हैं। यह प्रक्रिया थायरॉइड फंक्शन को संतुलित रखने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे लोगों में अक्सर शरीर में सूजन और अतिरिक्त पानी जमा होने की शिकायत होती है। ऐसे में सिंघाड़ा शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को कम करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है, जिससे दिल की सेहत भी बेहतर बनी रहती है।

सिंघाड़ा पेट के लिए भी काफी हल्का और आरामदायक भोजन माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सुधारता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। सर्दियों में इसकी आसान उपलब्धता इसे रोजमर्रा के आहार का हिस्सा बनाना और भी सरल बना देती है।

सिंघाड़ा कई तरीकों से खाया जा सकता है। लोग इसे कच्चा खाते हैं, उबालकर नमक-मिर्च के साथ खाते हैं, भूनकर चटखारे लेते हैं या फिर इसके आटे से हलवा, पूरी और पकौड़े भी बनाते हैं। हालांकि, किसी गंभीर थायरॉइड समस्या या अन्य स्वास्थ्य विकार की स्थिति में सिंघाड़े को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सिंघाड़ा स्वाद और सेहत का ऐसा संतुलन है, जो सर्दियों में शरीर को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाए रखता है।

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