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मध्य क्षेत्रीय परिषद में उत्तराखण्ड ने पेश किए 13 विकास बिंदु, केंद्र सरकार ने जताई सकारात्मक प्रतिक्रिया

देहरादून।
नवा रायपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित **मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक** में उत्तराखण्ड राज्य ने अपनी सशक्त और प्रभावी प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस बैठक में उत्तराखण्ड द्वारा कुल **13 बिंदु/विषय** केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जो किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सर्वाधिक थे। बैठक में उत्तराखण्ड की ओर से उठाए गए विषयों पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए उनके क्रियान्वयन का आश्वासन दिया।

इस बैठक की विशेषता यह रही कि इसमें न केवल **राज्य के विकास संबंधी मुद्दों** पर ध्यान दिया गया, बल्कि इससे क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय को भी नई दिशा मिली। बैठक में **उत्तराखण्ड के वरिष्ठ अधिकारी**, जिनमें प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं वन एवं पर्यावरण **आरके सुधांशु**, सचिव बीवीआरसी **पुरुषोत्तम**, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास **विनोद कुमार सुमन**, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग **राजेंद्र कुमार**, विशेष सचिव गृह **निवेदिता कुकरेती** और विशेष सचिव **पराग मधुकर धकाते** शामिल थे।

बैठक में चार राज्यों — **उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़** — के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने **सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, लंबित मामलों के समाधान और आपसी समन्वय** जैसे विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। उत्तराखण्ड द्वारा प्रस्तुत 13 बिंदुओं में **सामाजिक सुरक्षा, मेडिकल कॉलेज स्थापना, विद्युत संरचनाओं की सुरक्षा, रेल एवं रोड परियोजनाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय, आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास** जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे।

**मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी** ने बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह परिषद राज्यों के बीच **समन्वय और नीति निर्माण** के लिए प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ने विकास, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया। परिषद के माध्यम से प्राप्त सुझावों और सहमति के आधार पर राज्य में योजनाओं के **क्रियान्वयन में तेजी** आएगी, जिससे आम जनता को लाभ मिलेगा।

पूर्व में वाराणसी में आयोजित परिषद की बैठक में उठाए गए 11 बिंदुओं की समीक्षा भी इस बैठक में की गई। इनमें **खाद्य सुरक्षा, महिलाओं और बच्चों के यौन शोषण से संबंधित प्रकरण, फास्ट ट्रैक कोर्ट कार्यवाही, कुपोषण की रोकथाम, ईआरएसएस 112 सेवा, सहकारिता सुदृढ़ीकरण, आयुष्मान भारत योजना, बैंक शाखाओं की स्थापना** आदि शामिल थे।

बैठक में उत्तराखण्ड ने तीन **बेस्ट प्रैक्टिसेस** भी प्रस्तुत की, जबकि अन्य राज्यों ने तीन-तीन बिंदु प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने एक-दूसरे के अनुभव साझा किए, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं के **प्रभावी क्रियान्वयन** में मदद मिली।

मुख्य सचिव **आनंद बर्द्धन** ने सभी विभागों के साथ बैठक कर 13 बिंदुओं की प्रभावी तैयारी सुनिश्चित की। उत्तराखण्ड द्वारा उठाए गए विषयों में प्रत्येक जनपद में **मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु मानक संशोधन**, **सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि**, **निराश्रित गोवंशीय पशुओं का संरक्षण**, **विद्युत और अन्य संरचनाओं का आपदा प्रबंधन**, **मेरठ-ऋषिकेश आरआरटीएस विस्तार**, **हरिद्वार-हर्रावाला रेल लाइन डबलिंग**, **सिंचाई नहरों का पुनर्निर्माण**, **आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय**, **वन भूमि हस्तांतरण से आपदा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास**, और **वन संरक्षण अधिनियम में सुधार** शामिल थे।

प्रमुख सचिव **आरके सुधांशु** ने कहा कि परिषद की यह बैठक उत्तराखण्ड के लिए **महत्वपूर्ण मील का पत्थर** रही। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड की ओर से सभी बिंदुओं को ठोस तर्कों और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति की **केंद्रीय सरकार ने सराहना** की और शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया।

बैठक के दौरान **राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नवाचारपूर्ण पहलों और बेस्ट प्रैक्टिसेस** पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस अवसर का उपयोग आपसी सहयोग बढ़ाने और नीति निर्माण में गुणवत्ता लाने के लिए किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिषद के माध्यम से **क्षेत्रीय असंतुलन दूर करना** और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना संभव हुआ है। उत्तराखण्ड ने इस बैठक में **जनहित, विकास और प्रशासनिक सुधारों** से जुड़े सभी बिंदुओं को प्रमुखता दी। परिषद से प्राप्त सुझाव और सहमति राज्य में **योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन** को सुनिश्चित करेंगे और नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा।

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