उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों की न्यायसंगत मांगों को लेकर जारी आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। पिछले 10 दिनों से लगातार धरने पर बैठे उपनल कर्मचारी सरकार से न्यूनतम वेतन, सेवा सुरक्षा और समान कार्य–समान वेतन जैसे अधिकारों की मांग कर रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखा रही, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
इसी बीच मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत कर्मचारियों से मुलाकात की। उन्होंने न केवल उनकी पीड़ा सुनी बल्कि उनके संघर्ष को कांग्रेस का पूरा समर्थन देने की घोषणा भी की। गोदियाल ने कहा कि लंबे समय से उपनल कर्मियों की आवाज़ को नजरअंदाज़ करना सरकार की “संवेदनहीनता और तानाशाही” का साफ उदाहरण है।
उन्होंने कहा,
“उपनल कर्मचारी राज्य की रीढ़ हैं। 10 दिनों से धूप–सर्दी में सड़क पर बैठे कर्मचारी सरकार की कठोरता का जीता-जागता प्रमाण हैं। कांग्रेस उनके साथ है और न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेगी।”
गोदियाल ने राज्य सरकार पर यह कहते हुए सीधा हमला बोला कि भाजपा सरकार रोजगार व्यवस्था, संविदा सुधार और कर्मचारियों के अधिकारों पर “जानबूझकर मौन” है। जबकि उपनल कर्मचारी ऐसी मांगें कर रहे हैं, जो पूरी तरह मानवीय, तर्कसंगत और संवैधानिक दायरे में आती हैं।
कांग्रेस ने इस दौरान अपनी तीन प्रमुख मांगें भी रखीं—
- सरकार तुरंत उपनल कर्मचारियों से वार्ता शुरू करे।
- उनकी मांगों के समाधान का समयबद्ध रोडमैप जारी करे।
- रोजगार सुरक्षा और पारदर्शी नीति पर ठोस निर्णय ले।
गणेश गोदियाल ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उपनल कर्मियों की मांगें पूरी करते हैं, तो वह स्वयं आंदोलनकारियों के साथ सरकार का अभिनंदन करेंगे।
कांग्रेस के इस समर्थन से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है, वहीं राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।








