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25 साल बाद भी अधूरा सवाल: उत्तराखंड की स्थायी राजधानी आखिर बनेगी कहाँ?

देहरादून।  Uttarakhand राज्य को बने 25 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी स्थायी राजधानी का सवाल पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। राज्य गठन के समय से ही यह मुद्दा राजनीतिक और क्षेत्रीय बहस का केंद्र बना हुआ है।

जब वर्ष 2000 में राज्य का गठन हुआ, तब तत्कालीन केंद्र सरकार के नेतृत्व में Atal Bihari Vajpayee ने राजधानी के मुद्दे को राज्य के लोगों पर छोड़ दिया था। प्रशासनिक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को देखते हुए Dehradun को अस्थायी राजधानी बनाया गया, जबकि उच्च न्यायालय Nainital में स्थापित किया गया।

राजधानी के स्थायी स्थान के चयन के लिए प्रदेश की पहली सरकार, जिसकी अगुवाई Nityanand Swami कर रहे थे, ने एक आयोग का गठन किया। बाद में बने दीक्षित आयोग ने कई वर्षों के अध्ययन के बाद 2008 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। जनमत सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोगों ने Bhararisain को राजधानी बनाने की इच्छा जताई, लेकिन आयोग के समक्ष बहुत कम जनप्रतिनिधियों ने औपचारिक रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

समय के साथ राजधानी का मुद्दा गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनावी राजनीति में इसे भावनात्मक मुद्दे के रूप में भी इस्तेमाल किया। इसी क्रम में वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Trivendra Singh Rawat की सरकार ने भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराया, जिसे तत्कालीन राज्यपाल Baby Rani Maurya ने मंजूरी दी।

हालांकि, स्थायी राजधानी को लेकर बहस आज भी जारी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी केवल प्रशासनिक भवनों का समूह नहीं होती, बल्कि वह राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र भी होती है। इसलिए इसका चयन व्यावहारिक आधार पर होना चाहिए, ताकि प्रदेश के सभी क्षेत्रों के लोग आसानी से वहां पहुंच सकें।

वर्तमान समय में पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सीमावर्ती गांव खाली हो रहे हैं और पर्यावरणीय संकट भी बढ़ रहा है। ऐसे में नई राजधानी बसाने से पहले पर्यावरणीय संतुलन और क्षेत्रीय विकास जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।

राजधानी का मुद्दा भावनाओं से जुड़ा जरूर है, लेकिन इसके समाधान के लिए व्यावहारिक सोच और दूरदर्शिता की जरूरत है।

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