देहरादून।
मुख्यमंत्री **पुष्कर सिंह धामी** के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार का **“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान** राज्य में जनसरोकारों को धरातल पर उतारने का एक प्रभावी और सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस पहल का उद्देश्य शासन और आम नागरिक के बीच **सीधा संवाद** स्थापित करना और लोगों तक सरकारी योजनाओं तथा सेवाओं को **आसानी से पहुँचाना** है।
इस अभियान के तहत प्रदेशभर में लगातार **जनहितकारी शिविरों** का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में आम नागरिक सरकारी योजनाओं, विभिन्न प्रमाणपत्रों, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य लाभकारी सेवाओं का **सीधा लाभ** अपने नजदीकी स्थान पर ही प्राप्त कर सकते हैं। अभियान का मुख्य फोकस **सुविधा, सहभागिता और विश्वास** स्थापित करना है, जिससे जनता और सरकार के बीच एक सकारात्मक और पारदर्शी संबंध बने।
आज के दिन राज्य में कुल **16 शिविरों** का आयोजन किया गया, जिनमें **6,820 नागरिकों** ने प्रत्यक्ष रूप से सरकारी सेवाओं का लाभ उठाया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की योजनाएँ अब केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि **ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू** हो रही हैं। शिविरों में लोगों की समस्याओं को तुरंत सुलझाने के लिए अधिकारियों की टीम भी मौजूद रहती है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और त्वरित वितरण सुनिश्चित होता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अभियान **सरकारी नीतियों और योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाने में क्रांतिकारी कदम** साबित हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसे शिविरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी ताकि **हर नागरिक** अपने अधिकारों और लाभों के प्रति जागरूक हो और सरकारी सहायता सीधे उसके द्वार तक पहुँचे।
**इस पहल से स्पष्ट हुआ है कि उत्तराखण्ड सरकार जनता-केंद्रित और पारदर्शी शासन की दिशा में लगातार अग्रसर है।**








