नई दिल्ली। वैश्विक विकास की दिशा में दुनिया जिस राह पर चल रही है, वह चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने सोमवार को न्यूयॉर्क में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह चेतावनी दी कि सिर्फ 35 प्रतिशत सतत विकास लक्ष्य (SDGs) ही निर्धारित समय सीमा तक पूरे होने की ओर अग्रसर हैं। शेष लक्ष्य या तो धीमी गति से बढ़ रहे हैं या पीछे की ओर लौट रहे हैं, जो वैश्विक विकास के लिए गंभीर संकट का संकेत है।
‘वैश्विक विकास का आपातकाल’
‘सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2025’ जारी करते हुए महासचिव गुटेरेस ने कहा, “हम एक ऐसे मोड़ पर हैं, जहाँ से अगर त्वरित और सामूहिक प्रयास नहीं हुए तो हम 2030 तक अधिकांश लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाएंगे। यह वैश्विक विकास का आपातकाल है, जिससे निपटने के लिए स्पष्ट रणनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।”
गुटेरेस ने यह भी बताया कि पिछले दस वर्षों में शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वच्छ ऊर्जा और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कुछ प्रगति हुई है। बाल विवाह में गिरावट और महिलाओं की राजनीतिक व सामाजिक भागीदारी में वृद्धि सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन इन प्रयासों की गति और व्यापकता अभी भी वांछित स्तर पर नहीं है।
गरीबी, संघर्ष और जलवायु संकट बने बाधा
महासचिव ने बताया कि अब भी 80 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन बिता रहे हैं। यह स्थिति तब है जब विश्व अर्थव्यवस्था के आकार और तकनीकी प्रगति में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 18 प्रतिशत लक्ष्य ऐसे हैं जो पीछे की ओर जा रहे हैं, यानी उनमें न केवल प्रगति नहीं हो रही बल्कि पिछड़ापन और बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि जलवायु परिवर्तन, कर्ज संकट और युद्धों ने विकास की रफ्तार को गहराई से प्रभावित किया है। गाजा, यूक्रेन, सूडान और पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों ने करोड़ों लोगों को अस्थिरता और असुरक्षा की ओर धकेला है।
उप महासचिव ली जुनहुआ ने प्रस्तुत किए आंकड़े
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के अवर महासचिव ली जुनहुआ ने रिपोर्ट के आंकड़ों को साझा करते हुए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया:
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वर्ष 2010 की तुलना में एचआईवी संक्रमण में 40% की गिरावट आई है।
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2000 से अब तक मलेरिया की रोकथाम से 1.2 करोड़ जीवन बचाए गए हैं।
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2015 से अब तक 11 करोड़ से अधिक बच्चों का स्कूलों में नामांकन हुआ है।
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विश्व की 92 प्रतिशत आबादी को अब बिजली की पहुंच प्राप्त है।
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इंटरनेट उपयोग में 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्वच्छ जल, उचित स्वच्छता, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, और लैंगिक समानता जैसे क्षेत्रों में अभी भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में सुझाए गए छह प्राथमिक परिवर्तन क्षेत्र
रिपोर्ट के अनुसार, यदि वैश्विक समुदाय को 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना है तो छह क्षेत्रों में परिवर्तन को प्राथमिकता देनी होगी:
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खाद्य प्रणाली सुधार
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स्वच्छ और सुलभ ऊर्जा का विस्तार
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डिजिटल कनेक्टिविटी में समान पहुंच
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सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता और समावेशिता
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टिकाऊ और न्यायसंगत रोजगार सृजन
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जलवायु परिवर्तन की प्रभावी रोकथाम और अनुकूलन
इन क्षेत्रों में निवेश और नीति निर्माण को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
2030 एजेंडा की गंभीर चुनौती
सतत विकास लक्ष्य (SDGs) वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित किए गए थे, जिनका उद्देश्य वर्ष **2030 तक गरीबी उन्मूलन








