---Advertisement---

वीर अब्दुल हमीद की शहादत दिवस पर देहरादून में दी गई श्रद्धांजलि

देहरादून। नेताजी संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने आज *भारत-पाक युद्ध 1965* के अमर शहीद और परमवीर चक्र विजेता *क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद* की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। समिति के सदस्यों ने *वीर अब्दुल हमीद चौक (तहसील चौक)* पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस को नमन किया।

ज्ञात हो कि वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को हुआ था। उन्होंने अपने अल्प जीवन में ही भारत के दो बड़े युद्धों—*1962 का भारत-चीन युद्ध* और *1965 का भारत-पाक युद्ध*—में अपनी वीरता का लोहा मनवाया। खासतौर पर 1965 के युद्ध में जब पाकिस्तान ने अमेरिका से प्राप्त *पैटन टैंकों* पर घमंड किया, तब अब्दुल हमीद ने अपनी अद्वितीय रणनीति और साहस से कई टैंकों को ध्वस्त कर दुश्मन को हिला दिया। इस दौरान वह वीरगति को प्राप्त हुए और इतिहास के पन्नों में अमर हो गए।

समिति के उपाध्यक्ष *प्रभात डंडरियाल* और महासचिव *आरिफ वारसी* ने कहा कि अब्दुल हमीद ने युद्धभूमि में यह साबित कर दिया था कि सच्चा सैनिक अपने प्राणों की आहुति देकर भी देश को सर्वोपरि मानता है। उनका योगदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

समिति ने जिला प्रशासन से मांग की कि *वीर अब्दुल हमीद चौक* पर उनकी स्मृति में पट्टिका लगाई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि यह चौक किस महान शहीद के नाम पर है।

श्रद्धांजलि देने वालों में समिति के पदाधिकारी *आरिफ वारसी, प्रभात डंडरियाल, दानिश नूर, प्रदीप कुकरेती, इलियास कुरैशी, जय बिष्ट, सुशील विरमानी, विजेंद्र रावत, इम्तियाज अहमद* और *पारस यादव* सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि देश वीर अब्दुल हमीद के बलिदान को कभी नहीं भुला पाएगा और उनकी गाथा सदैव राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी।

 

Related Post