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सकल घरेलू उत्पाद का वृद्धि दर का लाभ, देश के गरीब जनता को नहीं मिल रहा है

देश में विकास की पैमाना को सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर से भले ही आंकलन किया जा रहा है लेकिन इस वृद्धि दर का कोई भी लाभ गरीब जनता को नहीं मिल रहा है।
आज जारी एक प्रेस बयान में नागरिक अधिकार रक्षा मंच के संयोजक सुखरंजन नंदी और उप संयोजक नजीब कुरैशी ने बताया कि देश की सरकार ने देश की जीडीपी के वृद्धि दर को देश की अर्थ व्यवस्था की विकास का पैमाना मान रहे है लेकिन देश की गरीब जनता की असली स्थिति पर नजर डालने के बाद यह स्पष्ट होता है कि इस विकास का फल गरीबों की जीवन स्तर को सुधारने में कोई मददगार साबित नहीं हो रहा है।
नेताओं ने कहा कि देश को विश्व के तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने के तमाम प्रचार के बाद भी देश के 13.7 प्रतिशत जनता कुपोषण के शिकार है। दुनिया के 127 देशों में भुखमरी में भारत का स्थान 105 वा है।देश के 35.5 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है और 27 प्रतिशत बच्चे कम वजन के शिकार है।
मंच के नेताओं ने कहा कि प्रदेश में 61 प्रतिशत महिलाओं एनीमिया ( खून की कमी) के शिकार है। जब कि देश में यह दर 53 प्रतिशत है।प्रदेश में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार में 41 है।प्रदेश के आदिवासियों की आर्थिक स्थिति दयनीय है।
उन्होंने कहा कि मोदी के शासनकाल में देश में महंगाई बढ़ी है,एकतरफ जनता के रोजी रोटी पर हमला और दूसरी तरफ महंगाई के कारण जनता के सामने खाद्य सुरक्षा का संकट पैदा हो गया है। खाने तेल की कीमत इस बीच दोगुना हुई है।तेल के बाजार में अदानी का इजारेदारी कायम हुआ हैऔर मोदी जी मोटापा कम करने के लिए देशवासियों को कम तेल खाने का उपदेश दे रहे है।प्रदेश के गरीब आदिवासी परिवार अपनी न्यूनतम दो वक्त के भोजन तक पर्याप्त मात्रा में नहीं ले पाते है। इस बात को ऊपर के आंकड़े ही प्रमाणित करता है।महंगाई का दर करीब 10 प्रतिशत है ऐसी स्थिति में गरीब जनता के लिए अपनी जरूरत की पौषक आहार जुगाड करना काफी मुश्किल हो रहा है।
अब मोदी जी के दोस्त अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को दूध से उत्पादित सामग्री, मुर्गा, भुट्टा, सोयाबीन, सेव,अंगूर,फल,बादाम अमेरिका से खरीदने के लिए दवाब बना रहा है।ऐसी स्थिति में हमारे देश के किसान और तबाह एवं बर्बाद हो जाएंगे।देश के किसानों की तबाह होने का मतलब है गरीब जनता के सामने अपनी खाद्य सुरक्षा के संकट को और गहरा होना ही है।

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