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बाढ़ का पानी उतरा, पर असली संकट अब शुरू – खेत बर्बाद, गांवों में जहरीले जीवों का खतरा!

औरैया/इटावा/जालौन: उत्तर प्रदेश के पंचनद धाम क्षेत्र, जहां यमुना, चंबल, सिंध, पहूज और कुंवारी नदियों का संगम होता है, हाल ही में आई भीषण बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहा। अब जब बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन बाढ़ के बाद की समस्याएं और भी ज्यादा परेशान करने वाली बन गई हैं।

नदी किनारे बसे गांवों में कीचड़, गंदगी और सड़ांध से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खेतों में जमी गाद और टूटी सड़कों ने आवाजाही मुश्किल बना दी है। साथ ही, सांप, जहरीले कीड़े और मच्छरों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ तो चली गई, लेकिन अब संक्रमण और बीमारियों का डर सता रहा है।

किसानों की हालत सबसे खराब है। चंबल किनारे बसे गांवों में बाजरा, उड़द और तिल की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। हजारों बीघा खेत पानी में डूबने से बुवाई का समय भी निकल गया है, जिससे आगामी महीनों में आर्थिक संकट की आशंका गहरा रही है।

प्रशासन ने राहत और पुनर्वास कार्य शुरू कर दिया है। फसल नुकसान के सर्वे के लिए टीमें गांव-गांव भेजी गई हैं और जल्द मुआवजा वितरण का आश्वासन दिया गया है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को भी सक्रिय किया गया है। गांवों में दवा छिड़काव, रोगों की रोकथाम और सफाई अभियान की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

ग्राम पंचायत अधिकारी अरमान खान ने जानकारी दी कि गांवों में सफाई का कार्य शुरू करवा दिया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि मुआवजा और स्वास्थ्य सेवाएं जल्द से जल्द पहुंचाई जाएं, ताकि बाढ़ के बाद की त्रासदी से उबरा जा सके।

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