अल्मोड़ा का क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, जहां युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को दिशा देने का कार्य होता है, आज स्वयं गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। एक ओर जहां हर वर्ष हजारों युवा नौकरी की उम्मीद में इस कार्यालय में पंजीकरण कराते हैं, वहीं दूसरी ओर यह कार्यालय खुद कर्मचारियों की भारी कमी से प्रभावित है। इस स्थिति का असर न केवल कार्यालय के कार्यों पर पड़ रहा है, बल्कि इससे हजारों युवाओं की उम्मीदों को भी गहरा झटका लग रहा है।
17 पदों में से केवल 9 पदों पर तैनाती
सेवायोजन कार्यालय में कुल 17 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां केवल 9 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। शेष आठ पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी का पद भी लम्बे समय से खाली है। इस महत्वपूर्ण पद के रिक्त रहने के कारण पूरे कार्यालय की प्रशासनिक और रणनीतिक कार्यप्रणाली बाधित हो रही है।
इन नौ कर्मचारियों पर ही रोजगार पंजीकरण, पंजीकृत युवाओं के नवीनीकरण, करियर काउंसलिंग, विभिन्न विभागीय आंकड़ों का संकलन, और कार्यालय प्रबंधन जैसी तमाम जिम्मेदारियाँ हैं। एक ओर जहां सेवायोजन कार्यालय युवाओं के भविष्य निर्माण में सहायक बनता है, वहीं यहां कर्मचारियों की यह गंभीर कमी सेवाओं की गुणवत्ता और गति को प्रभावित कर रही है।
53,724 युवा पंजीकृत, लेकिन संसाधन सीमित
सेवायोजन कार्यालय में वर्तमान में 53,724 युवा पंजीकृत हैं, जिनके पंजीकरण का नवीनीकरण समय-समय पर किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही इन युवाओं के करियर मार्गदर्शन, रोजगार मेलों का आयोजन, और निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों से समन्वय स्थापित करना भी कार्यालय की जिम्मेदारियों में शामिल है। लेकिन मात्र नौ कर्मचारियों से इतने व्यापक कार्यों को संचालित करना अत्यंत कठिन हो गया है।
छह जिलों की जिम्मेदारी, लेकिन अधिकारी का पद खाली
यह भी उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा कार्यालय के अधीन कुल 19 उपकार्यालय कार्यरत हैं, जो अल्मोड़ा, बागेश्वर, ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल जैसे छह जिलों में फैले हुए हैं। इन सभी उपकार्यालयों की निगरानी की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी पर होती है। लेकिन यह पद रिक्त होने के कारण न केवल इन कार्यालयों का निरीक्षण प्रभावित हो रहा है, बल्कि समन्वय, योजना निर्माण और संचालन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।
कर्मचारियों की कमी से कार्य प्रभावित
प्रभारी क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी आरके पंत ने बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कार्यालय के अनेक कार्यों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों की जानकारी सेवायोजन निदेशालय को भेजी गई है और तैनाती प्रक्रिया जारी है। हालांकि, इस प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है, जिससे समस्या और गहरी होती जा रही है।
युवाओं को समय पर सेवाएं नहीं मिल पा रहीं
रोजगार की उम्मीद से सेवायोजन कार्यालय पहुंचने वाले युवाओं को समय पर सेवा और मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। करियर काउंसलिंग और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाले सत्रों की संख्या भी कम हो गई है। वहीं, रोजगार मेलों के आयोजन की गति भी धीमी पड़ी है। इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ रहा है जो इस कार्यालय से रोजगार और करियर मार्गदर्शन की आस लगाए हुए हैं।
रिक्त पदों पर शीघ्र तैनाती की मांग
स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों की मांग है कि सेवायोजन कार्यालय में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि जब सरकार युवाओं को रोजगार देने की बात करती है, तो उसे ऐसे कार्यालयों को भी सशक्त करना चाहिए जो इस दिशा में सीधा कार्य करते हैं। यदि इन कार्यालयों की स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो न केवल रोजगार सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी बल्कि सरकारी योजनाओं की सफलता भी अधूरी रह जाएगी।
निष्कर्ष
अल्मोड़ा का क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, जो युवाओं को रोजगार दिलाने और मार्गदर्शन देने का प्रमुख केंद्र है, स्वयं ही बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। केवल नौ कर्मचारियों के सहारे इतनी बड़ी जिम्मेदारियों को निभाना न केवल कर्मचारियों के लिए कठिन है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं के हितों के साथ भी अन्याय है जो बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए यहां पंजीकरण कराते हैं। प्रशासन और सरकार को इस ओर शीघ्र ध्यान देते हुए रिक्त पदों को भरना चाहिए, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे और युवाओं को समय पर उचित मार्गदर्शन और अवसर मिल सकें।








